SECL के सीएमडी हरीश दुहन को डब्ल्यूसीएल के सीएमडी का अतिरिक्त प्रभार

बिलासपुर, 31 जनवरी । कोयला मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी आदेश के तहत साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन को वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह अतिरिक्त जिम्मेदारी 01 फरवरी 2026 से प्रभावी होगी, जो प्रारंभिक रूप से तीन माह की अवधि अथवा आगामी आदेश तक लागू रहेगी।
हरीश दुहन ने 27 मार्च 2025 को एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक का पदभार ग्रहण किया था। उनके नेतृत्व में एसईसीएल ने कोयला उत्पादन, भू-अधिग्रहण, सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल खनन तथा महिला सशक्तीकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। विशेष रूप से भू-अधिग्रहण के मोर्चे पर एसईसीएल को बड़ी सफलता मिली है, जहां अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच रिकॉर्ड 236 हेक्टेयर भूमि का पजेशन प्राप्त किया गया, जिससे कंपनी की मेगा परियोजनाओं को गति और उत्पादन क्षमता को मजबूत आधार मिला है।
हरीश दुहन के मार्गदर्शन में एसईसीएल देश की पहली ऐसी कोल पीएसयू बनी, जिसने भूमिगत खदानों में पेस्ट-फिल तकनीक को अपनाया। इसके साथ ही कोल इंडिया की पहली पूर्णतः महिला-संचालित डिस्पेंसरी और ऑल-वूमेन सेंट्रल स्टोर यूनिट की शुरुआत कर एसईसीएल ने महिला सशक्तीकरण और कार्यस्थल समावेशन के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित किए हैं।
कोयला खनन क्षेत्र में हरीश दुहन को 34 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव प्राप्त है। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से माइनिंग इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की है। वर्ष 1989 में उन्होंने वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड से अपने करियर की शुरुआत की थी। उनके पास फर्स्ट क्लास माइन मैनेजर सर्टिफिकेट के साथ-साथ प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा भी है।
अपने लंबे करियर के दौरान वे सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड में निदेशक (तकनीकी-संचालन) के पद पर कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की निगाही परियोजना में एरिया जनरल मैनेजर तथा कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट प्लानिंग विभाग के महाप्रबंधक के रूप में भी उन्होंने अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं।
हरीश दुहन को पर्यावरण के अनुकूल फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी परियोजनाओं, डिजिटलीकरण और सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विकास व क्रियान्वयन का विशेष अनुभव है। उनके नेतृत्व में एसईसीएल के साथ-साथ अब डब्ल्यूसीएल को भी आधुनिक, सतत और भविष्य-उन्मुख दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।










