KORBA News: गेवरारोड स्टेशन पर यात्री सुविधाओं की बहाली का इंतजार, 35 गांवों के लोगों में बढ़ रहा आक्रोश

कोरबा। गेवरारोड रेलवे स्टेशन पर कोविड-19 महामारी के दौरान बंद की गई यात्री सुविधाएं आज तक पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी हैं। क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि रेलवे प्रशासन स्टेशन के सौंदर्यीकरण और आधारभूत ढांचे को विकसित करने पर तो करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
गेवरारोड रेलवे स्टेशन पर आसपास के लगभग 35 गांवों के हजारों लोग प्रतिदिन निर्भर रहते हैं। कोविड काल से पहले यहां शिवनाथ एक्सप्रेस, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस सहित कई यात्री ट्रेनों का ठहराव और नियमित पैसेंजर सेवाएं उपलब्ध थीं। वर्तमान में यात्रियों को केवल गेवरारोड-रायपुर-गेवरारोड मेमू तथा गेवरारोड-बिलासपुर-गेवरारोड मेमू ट्रेनों का ही सहारा है। अन्य ट्रेनों से यात्रा करने के लिए लोगों को 17 से 25 किलोमीटर दूर कोरबा स्टेशन जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है।
कई बार हुआ आंदोलन, नहीं निकला समाधान
यात्री सुविधाओं की बहाली और ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर क्षेत्र में कई बार आंदोलन किए जा चुके हैं। रेल संघर्ष समिति, श्रमिक संगठनों, माकपा और भाकपा के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन आयोजित हुए। प्रदर्शनकारियों को अधिकारियों द्वारा आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। कुसमुंडा व्यापारी संघ ने भी गांधीगिरी के माध्यम से अपनी मांगों को उठाया था, फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
बैठकों तक सिमट गया आंदोलन
कोरबा विकास समिति (रेल) के नेतृत्व में एक बार फिर यात्री सुविधाओं की मांग को लेकर लोगों को संगठित करने का प्रयास किया गया। आंदोलन की रणनीति के तहत तीन बैठकें आयोजित की गईं और एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा। बताया जाता है कि कलेक्टर ने मामले में कार्रवाई के लिए 15 दिनों का समय मांगा था, लेकिन डेढ़ माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई सकारात्मक पहल दिखाई नहीं दी। इसके बाद आंदोलन की अगुवाई करने वाले लोग भी शांत हो गए, जिससे रेलवे प्रशासन पर दबाव कम हो गया है।
जनता ने उठाए सवाल
क्षेत्रवासियों का कहना है कि रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यात्रियों की आवश्यक सुविधाओं और ट्रेनों के ठहराव को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि जब तक पूर्व की सुविधाएं बहाल नहीं होतीं, तब तक स्टेशन का विकास अधूरा माना जाएगा। क्षेत्र की जनता ने रेलवे प्रशासन से जल्द से जल्द यात्री सुविधाओं की बहाली और ट्रेनों के स्टॉपेज बढ़ाने की मांग की है।




