Chhattisgarh

KORBA : दागी कर्मचारी को बना दिया प्रभारी प्रबंधक, पूर्णकालिक प्रबंधक को अधीन किया फड़ प्रभारी—धान खरीदी व्यवस्था में नियमों की खुली अवहेलना

कोरबा, 11 जनवरी। आकांक्षी जिला कोरबा में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है। कर्मचारियों को सौंपे गए कार्य-दायित्व आदेशों में नियम-कायदों को ताक पर रखकर ऐसे कर्मचारियों को जिम्मेदारी दे दी गई है, जिन पर पहले ही अनियमितताओं के आरोप हैं।

मामला पोंडी उपरोड़ा ब्रांच अंतर्गत समिति कुलहरिया का है। यहां पिछले वर्ष संपन्न हुए धान खरीदी अभियान में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। जिला प्रशासन द्वारा संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ अपराध दर्ज कराया गया था। इसके बावजूद उसी समिति के दागी दैवेभो कर्मचारी को इस वर्ष प्रभारी प्रबंधक बना दिया गया, जबकि वहां पदस्थ पूर्णकालिक प्रबंधक को फड़ प्रभारी का दायित्व सौंप दिया गया है।

इस निर्णय से कार्यकारी उप पंजीयक से लेकर पोंडी ब्रांच मैनेजर तक की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व कलेक्टर अजीत वसंत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि प्रबंधकों को फड़ प्रभारी के दोहरे दायित्व से मुक्त रखा जाए, ताकि धान खरीदी में पारदर्शिता बनी रहे। बावजूद इसके कोरकोमा और अखरापाली समितियों में इन निर्देशों की अनदेखी की गई है।

सूत्रों के अनुसार कार्यालय उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं द्वारा जिला प्रशासन को गुमराह कर नियमों के प्रतिकूल कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है, जिससे धान खरीदी व्यवस्था का माखौल उड़ाया जा रहा है। यही नहीं, पाली सहकारिता विस्तार अधिकारी को निरधि, पोंडी और चैतमा समितियों का प्राधिकृत अधिकारी बनाए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस “विशेष मेहरबानी” के पीछे क्या कारण हैं, इसे लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।

जानकारों का कहना है कि जिन समितियों में इस तरह नियमों की अनदेखी कर दायित्व सौंपे गए हैं, वहां हुए भुगतान और धान खरीदी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित गड़बड़ी का खुलासा हो सके।

इस पूरे मामले पर प्रभारी उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं कोरबा एम. आर. ध्रुव ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी आपके माध्यम से मिल रही है। मामले की तत्काल जांच कराई जाएगी और नियमों की अवहेलना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संचालक मंडल भंग होने की स्थिति में सहकारिता विस्तार अधिकारियों को व्यवस्थांतर्गत प्राधिकृत अधिकारी बनाया गया है।

अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी कागजों में ही सिमट कर रह जाएगा।

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