Chhattisgarh

CG : शराब घोटाले की तर्ज पर पशु दवा घोटाला! 10% पशु औषधि की खरीदी ,100% दवाई खरीदी का फर्जी भुगतान!

पूर्व गृहमंत्री ननकीराम की शिकायत पर नपेंगे जिम्मेदार ,संचालक ने दिए जांच के आदेश,एक सप्ताह में मांगी रिपोर्ट ,महकमे में मचा हड़कम्प

रायपुर । पशुपालन विभाग में पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में प्रदेश के सभी जिलों के तत्कालीन जिला अधिकारियों (उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं ) द्वारा पशु औषधि ,वैक्सीन एवं फीड सप्लीमेंट की आपूर्ति के लिए राज्य भंडार क्रय नियमों की अनदेखी कर कम सप्लाई लेकर सामाग्रियों का डीलरों को पूरा भुगतान किए जाने के मामले में तत्कालीन संचालनालय ,जिला व डीलरों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।

संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं छत्तीसगढ़ शासन चंद्रकांत वर्मा ने पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के 29 जुलाई को लिखे पत्र में संज्ञान लेते हुए 6 सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दिया है। जो न केवल एक सप्ताह के भीतर पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में किए गए अनियमितताओं की जांच /परीक्षण कर प्रतिवेदन मय अभिमत भेजेगी वरन वर्तमान में भी उक्त भ्रष्टाचार के सिलसिले को खत्म करने वर्तमान में भंडार क्रय नियमों के विपरीत की गई निविदा को निरस्त कर सेंट्रलाइज खरीदी हेतु सीधे दवा निर्माताओं से निविदा बुलाकर उन्हीं से दवा लेकर उन्हीं को भुगतान किए जाने के मामले की भी जांच करेगी। उक्त जांच आदेश से महकमे में हड़कम्प मच गया है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आदिवासी नेता पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने शराब घोटाला की तर्ज पर पशु औषधि घोटाला खरीदी में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर करने के संबंध में 29 .07.2025 को पत्र लिखा था। शिकायत पत्र में प्रमुख रूप से उल्लेख किया गया था कि पशुपालन विभाग में पशु औषधि ,वैक्सीन एवं फीड सप्लीमेंट की आपूर्ति के लिए राज्य भंडार क्रय नियमों की अनदेखी कर कम सप्लाई लेकर सामाग्रियों का डीलरों को पूरा भुगतान किया गया है।

जिसमें संचालनालय के अधिकारियों,जिला अधिकारियों ,स्थानीय दवा डीलरों (विक्रेताओं)की सांठगांठ (संलिप्तता ) है। उन्होंने वर्तमान में उक्त भ्रष्टाचार के सिलसिले को खत्म करने वर्तमान में भंडार क्रय नियमों के विपरीत की गई निविदा को निरस्त कर सेंट्रलाइज खरीदी हेतु सीधे दवा निर्माताओं से निविदा बुलाकर उन्हीं से दवा लेकर उन्हीं को भुगतान किए जाने के मामले की भी जांच की मांग रखी थी।

जिसमें उन्होंने विस्तार से उल्लेख किया गया था कि प्रदेश में पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन काल से लेकर आज तक पशु चिकित्सा विभाग में राज्य व जिला स्तर पर पशुओं के उपचार मे उपयोग में आने वाले पशु औषधि की खरीदी के लिए सभी जिला के उपसंचालकों पशु चिकित्सा विभाग के माध्यम से पशु औषधि वैक्सीन, फिट सप्लीमेंट्री इत्यादि की खरीदी भंडार क्रय नियम के विपरीत किया गया है जिसमें 10% पशु औषधि की खरीदी होती है लेकिन फर्जी तरीके से 100% दवाई खरीदी का फर्जी भुगतान संबंधित डीलर को सांठ गांठ कर किया जाता है।

दवाई की खरीदी डीलरों के द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से खरीदी किया जाता है कोई भी कार्यालय दवाई निर्माता कंपनी से दवा सप्लीमेंट्री खरीदी नहीं की जाती जिसमें अरबो रुपए का पशु औषधि खरीदी में घोटाला सामने आने की संभावना दिख रही है।

ननकीराम कंवर ने मांग किया है कि पशु औषधि संबंधित निर्माता कंपनी से निविदा के आधार पर खरीदी की जाए जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाया जा सकता है और सतत रूप से दवाई की खरीदी हो सके पशु औषधि के नाम से फर्जी बिल के आधार पर जिन दवाई डीलरों और संबंधित जिला व राज्य के अधिकारी कर्मचारी सहित समझ दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की जाए।


संचालक पशु चिकित्सा चंद्रकांत वर्मा ने 14 अगस्त को एक जांच आदेश निकालकर 6 सदस्यीय टीम को जांच का जिम्मा सौंपा हैं। जांच टीम को एक सप्ताह के प्रकरण की जांच /परीक्षण कर प्रतिवेदन मय अभिमत मांगा गया है। अपर संचालक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी छ.ग. राज्य पशुधन विकास विभाग डॉ.लक्ष्मी अजगल्ले की अध्यक्षता में गठित जांच दल में डॉ. बी.पी.सतनामी संयुक्त संचालक ,संचालनालय ,पशु चिकित्सा सेवाएं ,डॉ.एस. एन. मिश्रा ,प्रभारी उप संचालक ,पशु चिकित्सा परिषद ,रायपुर , डॉ .सुधीर पंचभाई,पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ ,संचालनालय पशु चिकित्सा सेवाएं ,कु.योगिता कोसिमा सहायक लेखा अधिकारी ,संचालनालय पशु चिकित्सा सेवाएं सदस्य के तौर पर व लिपिकीय कार्य हेतु आकाश दास ,सहायक ग्रेड -2 ,संचालनालय पशु चिकित्सा सेवाएं शामिल किए गए हैं।

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