Chhattisgarh

BIG BREAKING : जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को उम्रकैद, HC का ऐतिहासिक फैसला, 21 दिन में सरेंडर या जेल! पढ़ें 78 पन्नों के फैसले की बड़ी बात

बिलासपुर,06 अप्रैल 2026। एनसीपी के नेता स्व. रामअवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए हाई कोर्ट ने हत्याकांड के प्रमुख आरोपी अमित जोगी को उम्र कैद की सजा सुनाई है। आजीवन कारावास के साथ ही एक हजार रुपये जुर्माना किया। जुर्माने की राशि ना पटाने पर छह महीने अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा दी है। फैसले की खास बात ये कि डिवीजन बेंच ने सतीश जग्गी की याचिका को खारिज कर दिया है। 78 पेज में डिवीजन बेंच का यह फैसला आया है।

​3 हफ्ते के भीतर करना होगा आत्मसमर्पण
आरोपी अमित जोगी उर्फ अमित ऐश्वर्या जोगी वर्तमान में जमानत पर हैं। उनकी जमानत आज से तीन सप्ताह की अवधि तक प्रभावी रहेगी, इस दौरान उन्हें संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा, ऐसा न करने पर ट्रायल कोर्ट उन्हें हिरासत में ले लेगा और सजा पूरी करने के लिए उन्हें जेल भेज देगा। रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह इस फैसले की एक प्रति, आरोपी अमित जोगी उर्फ अमित ऐश्वर्या जोगी को भेजे, और उन्हें सूचित करे कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष इस फैसले को चुनौती देने का अधिकार है। रजिस्ट्रार (न्यायिक) को यह निर्देश दिया गया है कि इस निर्णय की प्रमाणित प्रति और मूल रिकॉर्ड एक सप्ताह के भीतर संबंधित निचली अदालत को सूचना और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी जाए।

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा – “जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में सहभागिता का आरोप हो, तो किसी विशेष आरोपी के पक्ष में कृत्रिम भेदभाव नहीं किया जा सकता। जहां अभियोजन पक्ष का मामला सभी आरोपियों के खिलाफ समान साक्ष्यों पर आधारित हो, वहां एक आरोपी को बरी करते हुए अन्य को उसी साक्ष्य के आधार पर दोषी ठहराना अनुचित होगा, जब तक कि उस आरोपी के पक्ष में बरी करने का कोई ठोस और निर्णायक मामला स्वतंत्र रूप से सिद्ध न हो जाए।”

​सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और कानूनी घटनाक्रम
​याचिकाकर्ता सतीश जग्गी के अधिवक्ता बीपी शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मामला पुनर्विचार के लिए भेजा है।

​18 अगस्त 2011: राज्य के 31 मई 2007 के अपील अनुमति आवेदन को हाई कोर्ट ने खारिज किया था।
​12 सितंबर 2011: सीबीआई की याचिका विलंब के आधार पर खारिज हुई थी।
​19 सितंबर 2011: सतीश जग्गी की याचिका को आपराधिक अपील में बदलने की मांग खारिज हुई थी।
​6 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने देरी को क्षमा करते हुए मामला वापस भेजा और सीबीआई के वकील वैभव ए. गोवर्धन को सतीश जग्गी व राज्य को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।
​रायपुर एसपी को नोटिस तामिली के आदेश
​चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने रायपुर एसपी के माध्यम से नोटिस तामिल कराने और शपथ पत्र पेश करने का निर्देश दिया था। राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडे उपस्थित रहे।

कौन थे रामअवतार जग्गी?
​4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे और छत्तीसगढ़ में एनसीपी के कोषाध्यक्ष थे। इस मामले में पुलिस ने 31 लोगों को आरोपी बनाया था। बाद में बलटू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को दोषी करार दिया गया था।

​हत्याकांड में ये हैं दोषी
​अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर।

अमित जोगी के पास अब क्या है विकल्प?
​हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अमित जोगी के पास अब केवल देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) का रास्ता बचा है।

​अपील का अधिकार: हाई कोर्ट ने स्वयं अपने फैसले में अमित जोगी को यह अधिकार दिया है कि वे इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।
​स्टे की कोशिश: यदि अमित जोगी को 21 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट के इस फैसले पर ‘स्टे’ (स्थगन आदेश) मिल जाता है, तो उनकी गिरफ्तारी या सरेंडर टल सकता है।
​कानूनी पेच: अगर सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलती है, तो तय समय सीमा (3 सप्ताह) के भीतर उन्हें हर हाल में ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करना ही होगा।

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