Chhattisgarh

ACB समूह की कोयला वाशरियों की CBI जांच की मांग, 18 अगस्त को दीपका-गेवरा में जन आंदोलन

कोरबा। भारतीय जनाधिकार पार्टी, छत्तीसगढ़ ने ACB समूह की दीपका, गेवरा, कुसमुंडा, चकाबुड़ा, रतिजा, रेंकी और बिंझारी सहित संबद्ध कोयला वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, कोयला परिवहन और रेलवे साइडिंग से जुड़े मामलों की वर्ष 1999 से वर्तमान तक सीबीआई जांच कराने की मांग की है। पार्टी ने मामले में सीबीआई जांच के साथ उच्चस्तरीय विशेष जांच दल गठित करने, बहु-विभागीय न्यायिक एवं तकनीकी जांच कराने तथा वित्तीय और डिजिटल फोरेंसिक ऑडिट की मांग की है।

पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि मामला केवल किसी एक कोयला वाशरी या प्रदूषण से जुड़ा नहीं है, बल्कि कोयला खरीद, वाशरी संचालन, कच्चे एवं रिजेक्ट कोयले के परिवहन, कोयला लेखांकन, रेलवे साइडिंग, तौल कांटा, ताप विद्युत संयंत्रों में ईंधन उपयोग, राख और गाद निस्तारण, जल दोहन, औद्योगिक डीजल-बायोडीजल, कर लाभ और डिजिटल रिकॉर्ड की पूरी व्यवस्था की जांच जरूरी है।

भारतीय जनाधिकार पार्टी के संयोजक एवं अध्यक्ष दीपक दुबे, उपाध्यक्ष विंदेश सिंह, महामंत्री संगठन संजय सिंह, महामंत्री प्रशासनिक शैलेन्द्र कुमार गोपाल, सचिव घनश्याम चंद्रा, अशोक जायसवाल, युवा मोर्चा अध्यक्ष संजय रत्नाकर, पप्पू सरदार और जिला कोरबा संयोजक दिनेश यादव ने कहा कि प्रत्येक वाशरी की स्वीकृत क्षमता और वास्तविक उत्पादन या कोयला प्रसंस्करण का वर्षवार मिलान कराया जाना चाहिए। पर्यावरणीय स्वीकृति, सहमति पत्र, क्षमता विस्तार और संबंधित नियमों के पालन की भी जांच की मांग की गई है।

पार्टी ने एक करोड़ टन से अधिक कोयला परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड की भी स्वतंत्र जांच की मांग की है। खदान से वाशरी, वाशरी से रेलवे या सड़क और वहां से ताप विद्युत संयंत्र तक कोयले की पूरी सप्लाई चेन का मिलान कर एक-एक टन कोयले के स्रोत, प्रसंस्करण, रिजेक्ट उत्पादन, परिवहन, प्राप्तकर्ता और वास्तविक उपयोग का सत्यापन कराने की मांग की गई है।

रिजेक्ट कोयले की गुणवत्ता, ऊष्मीय मान, नमूना परीक्षण, भंडारण, प्रेषण और अंतिम उपयोग की स्वतंत्र जांच कराने की बात कही गई है। पार्टी ने यह भी जांचने की मांग की है कि कहीं उपयोगी कोयले को रिजेक्ट श्रेणी में दर्शाकर उसका अन्यत्र उपयोग या विचलन तो नहीं किया गया।

ताप विद्युत संयंत्रों में वास्तविक कोयला प्राप्ति, ईंधन उपयोग, बिजली उत्पादन और राख उत्पादन के आंकड़ों का फोरेंसिक मिलान कराने की मांग भी की गई है। इसके साथ ही तौल कांटा, सर्वर, जीपीएस, फास्टैग, आरएफआईडी, एएनपीआर, सीसीटीवी, वाहन रिकॉर्ड और रेलवे रेक से जुड़े डिजिटल दस्तावेजों की जांच कराने की मांग उठाई गई है। पार्टी ने संभावित फर्जी वाहन, दोहरी प्रविष्टि, गलत तौल और कोयले की मात्रा में हेरफेर की भी जांच की मांग की है।

दीपका-गेवरा क्षेत्र की नदियों, नालों और भूजल पर औद्योगिक गतिविधियों के प्रभाव की वैज्ञानिक जांच की मांग की गई है। खोलार नदी, अहिरन नदी और आसपास के जल स्रोतों से नमूने लेकर स्वतंत्र मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण कराने की बात कही गई है। साथ ही वाशरियों, ताप विद्युत संयंत्रों, रेलवे साइडिंग और भारी कोयला परिवहन से प्रभावित करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र में वायु प्रदूषण, धूल, राख, शोर, भूजल, कृषि भूमि और जनस्वास्थ्य का स्वतंत्र सर्वेक्षण कराने की मांग की गई है।

पार्टी ने पेसा क्षेत्रों में ग्रामसभा की कार्यवाही और सहमति से जुड़े रिकॉर्ड के सत्यापन के साथ औद्योगिक गतिविधियों में उपयोग की जा रही जमीन, वन एवं सामुदायिक संसाधनों की भी जांच की मांग की है।

वर्ष 2015 से वर्तमान तक औद्योगिक डीजल, एचएसडी और बायोडीजल की खरीद, भंडारण, परिवहन और उपयोग का वर्षवार मिलान कराने की मांग की गई है। इसके अलावा संबंधित कंपनियों को मिले कर लाभ, औद्योगिक प्रोत्साहन, विद्युत शुल्क में छूट और अन्य सरकारी लाभों की भी जांच कराने की मांग पार्टी ने की है।

वाशरी, कोयला परिवहन, रेलवे साइडिंग और ताप विद्युत संयंत्रों में कार्यरत श्रमिकों के वेतन, न्यूनतम मजदूरी, पीएफ, ईएसआई, सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य परीक्षण, दुर्घटना रिकॉर्ड और ठेका श्रम नियमों के पालन की जांच की मांग भी की गई है।

पार्टी का कहना है कि जांच केवल कंपनी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वर्षों से संचालित औद्योगिक गतिविधियों के दौरान SECL, पर्यावरण, खनन, राजस्व, वन, श्रम, जल संसाधन सहित संबंधित विभागों द्वारा किए गए निरीक्षण और कार्रवाई की भी जांच होनी चाहिए तथा लापरवाही मिलने पर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

भारतीय जनाधिकार पार्टी ने तौल कांटा सर्वर, जीपीएस, फास्टैग, सीसीटीवी, OCEEMS/CEMS, ERP/SAP, ईंधन रिकॉर्ड, रेलवे दस्तावेज और अन्य डिजिटल डेटा को तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की है, ताकि जांच के दौरान रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की संभावना न रहे।

पार्टी ने इन मांगों को लेकर 18 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे ACB (India) Ltd. कार्यालय, SECL परिक्षेत्र, दीपका-गेवरा के समक्ष शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और जन आंदोलन करने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि आंदोलन के माध्यम से वर्ष 1999 से वर्तमान तक पूरे मामले की निष्पक्ष सीबीआई और SIT जांच की मांग उठाई जाएगी।

भारतीय जनाधिकार पार्टी ने कहा कि कोयला राष्ट्रीय संपदा, पानी जीवन का आधार और जंगल-जमीन आने वाली पीढ़ियों की विरासत है। पार्टी ने मांग की है कि जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या अपराध प्रमाणित होता है तो प्राथमिकी, वसूली, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति और अभियोजन की कार्रवाई की जाए। पार्टी ने अपना संदेश देते हुए कहा कि हर टन कोयले का हिसाब, हर बूंद पानी का हिसाब और हर प्रदूषण की जांच होनी चाहिए तथा जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

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