बैतूल में भी लंपी की दस्तक: सैकड़ों मवेशी हुए पीड़ित, भैसदेही इलाके में प्रकोप, वैक्सीनेशन कर रहा विभाग, सर्वे भी शुरू

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बैतूल6 मिनट पहले
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बैतूल में भी जानवरों में लंपी रोग की दस्तक हो गई है। यहां भी डेढ़ सौ से ज्यादा पशुओं में रोग के लक्षण मिले हैं। जिसके बाद पशु चिकित्सा विभाग वैक्सिनेशन में जुट गया है।
जिले के भैसदेही तहसील इलाके में सबसे ज्यादा मवेशी लंपी से पीड़ित पाए गए हैं। जबकि, आठनेर के बोथी में भी इस रोग से पीड़ित पशुओं की खासी तादाद मिली है। पशु चिकित्सा विभाग इसके लिए जिले में सर्वे भी शुरू कर चुका है। जबकि रोग से निपटने वैक्सीनेशन का अभियान भी शुरू किया गया है।
ऐसे होती है रोग की शुरुआत
उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. विजय पाटिल ने बताया कि गौवंशीय पशुओं में फैलने वाला लंपी स्किन डिसीज विषाणु जनित रोग है। सामान्यतः यह बीमारी एक पशु से दूसरे पशु में मच्छर, काटने वाली मक्खी, किलनी, जुएं या अन्य बाह्य परजीवियों के काटने से फैलती है। इसके अतिरिक्त यह संक्रमित पशुओं की लार, दूषित जल एवं चारे से भी फैलती है। इस रोग की शुरुआत में पशु को बुखार आता है इसके पश्चात पूरे शरीर की त्वचा पर गठानें बन जाती है। यह गठानें गोल उभरी हुई होती हैं। गठानें घाव में भी बदल जाती हैं। आंख और नाक से पानी आता है साथ ही दुग्ध उत्पादकता में कमी, गर्भपात और कभी- कभी पशु की मृत्यु भी हो जाती है।

पशु को स्वस्थ्य होने में 2-3 सप्ताह का समय लगता है। लेकिन दुग्ध उत्पादकता में कमी कई सप्ताह तक बनी रहती है। विभाग द्वारा समस्त रोगी पशुओं का उपचार नियमित रुप से किया जा रहा है। रोग के प्रसार को रोकने के लिए विभाग द्वारा प्रभावित ग्रामों के चारों ओर के ग्रामों में रिंग वेक्सीनेशन (टीकाकरण) किया जा रहा है। पशुपालकों से अपील की जाती है कि वे संक्रमित पशुओं का उपचार करावें स्वस्थ्य पशुओं को प्रभावित पशुओं से अलग रखे। पशुओं का टीकाकरण करवाएं। पशुओं को रखने के स्थान की साफ-सफाई रखें, उचित उपाय कर मच्छर, मक्खी, किलनी आदि बाह्य परजीवियों पर नियंत्रण रखें तथा लम्पी स्किन डिसीज के लक्षण दिखने पर तत्काल निकटतम पशु चिकित्सालय में सूचना दें।
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