कोल इंडिया के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन बढ़ाने की मांग, एआईसीपीए ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

कोरबा,07 नवम्बर 2026।कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और उसकी अनुषंगी कंपनियों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। कोल माइंस पेंशन स्कीम (CMPS)-1998 के तहत मिलने वाली अपर्याप्त पेंशन और पेंशन फंड की वित्तीय स्थिति को लेकर ऑल इंडिया कोल पेंशनर्स एसोसिएशन (AICPA) ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर सेवानिवृत्त कोयला कर्मचारियों के लिए सम्मानजनक पेंशन और बेहतर सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
एआईसीपीए ने अपने ज्ञापन में कहा है कि कोल इंडिया में सरकारी हिस्सेदारी कम किए जाने से केंद्र सरकार को पर्याप्त वित्तीय संसाधन प्राप्त हुए हैं, लेकिन दूसरी ओर पूर्व कोयला कर्मचारियों के पेंशन फंड को अपेक्षित वित्तीय सहायता नहीं मिल पा रही है। इसके कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लंबे समय से पेंशन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि कोयला उद्योग में वर्षों तक देश की ऊर्जा जरूरतों और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा मिलना उनका अधिकार है।
इस मामले में प्रधानमंत्री के अलावा केंद्रीय वित्त मंत्री, केंद्रीय कोयला मंत्री, कैबिनेट सचिव, वित्त मंत्रालय और कोयला मंत्रालय के सचिवों को भी ज्ञापन की प्रतियां भेजी गई हैं। इसके साथ ही निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव, कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष तथा सिंगारेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक को भी इस विषय से अवगत कराया गया है।
एआईसीपीए ने सरकार से पेंशन फंड की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने और सीएमपीएस-1998 के तहत पेंशन की अपर्याप्तता का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। संगठन ने जोर दिया है कि सेवानिवृत्त कोयला कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवनयापन के लिए पर्याप्त पेंशन और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
यह मांग ऐसे समय में उठी है, जब केंद्र सरकार कोयला क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी कम करने और उनके पुनर्गठन की दिशा में कदम बढ़ा रही है। ऐसे में कोयला पेंशन योजना की वित्तीय मजबूती और लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों के भविष्य की सुरक्षा का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।




