चक्रवाती तूफान और बेमौसम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता, खेतों में बिछी धान की फसल, उत्पादन प्रभावित होने की आशंका

बेमेतरा, 29 अक्टूबर 2026। चक्रवाती तूफान के असर से बेमेतरा जिले में बुधवार दोपहर से जारी बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी और पककर तैयार धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर तेज हवाओं से धान की बालियां जमीन पर बिछ गई हैं। इससे उत्पादन प्रभावित होने के साथ ही फसल कटाई की लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ग्राम मजगांव निवासी किसान संतोष साहू ने बताया कि तेज हवा और लगातार बारिश के कारण धान की खड़ी फसल गिर गई है। खेतों की स्थिति ऐसी हो गई है कि धान की फसल जमीन पर बिछी नजर आ रही है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों की धान की कटाई हो चुकी है, उनकी फसल भी बारिश से प्रभावित हुई है। वहीं, पककर तैयार धान की कटाई में अब अधिक परेशानी होगी। गिरी हुई फसल की कटाई में अतिरिक्त मेहनत और खर्च लगेगा, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
धान खरीदी केंद्र का फड़ गीला, हाट बाजार स्थानांतरण से नाराजगी
बारिश का असर मारो क्षेत्र में भी देखने को मिला है। यहां धान खरीदी केंद्र का फड़ बारिश के कारण गीला हो गया है। दूसरी ओर, बस स्टैंड से हाट बाजार को आईटीआई मैदान में स्थानांतरित करने के निर्देश को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि प्रस्तावित स्थान पर शाम के समय बिजली और शेड की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। मामूली बारिश में भी मैदान में चलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वहां बाजार लगाने से व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
बाजारों में पसरा सन्नाटा, सब्जी उत्पादक भी परेशान
खंडसरा क्षेत्र में भी लगातार बारिश का व्यापक असर दिखाई दिया। स्थानीय निवासी राजा सिन्हा ने बताया कि बारिश के कारण दिनभर बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। रंग-पेंट और अन्य जरूरी सामग्री की खरीदारी के लिए ग्राहक बाजार नहीं पहुंचे, जिससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।
वहीं, धान के साथ सब्जी उत्पादक किसानों की परेशानी भी बढ़ गई है। लगातार बारिश से खेतों में नमी बढ़ने और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। किसानों का कहना है कि फसल पकने के समय हुई बारिश उनकी मेहनत पर पानी फेर सकती है। यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो नुकसान और बढ़ सकता है।
फिलहाल किसान मौसम में सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। धान की कटाई के महत्वपूर्ण समय में हुई इस बारिश ने किसानों के सामने उत्पादन घटने, फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने और कटाई की लागत बढ़ने जैसी कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।




