Chhattisgarh

कोरबा में 3.77 लाख वाहनों का दबाव, सड़कों की मजबूती पर उठ रहे सवाल

कोरबा, 26 अक्टूबर। औद्योगिक नगरी कोरबा में लगातार बढ़ती वाहनों की संख्या का दबाव जिले की सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है। मार्च 2026 तक जिले में सभी श्रेणियों के पंजीकृत वाहनों की संख्या बढ़कर 3 लाख 77 हजार तक पहुंच गई थी। वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के बाद भी वाहनों के पंजीकरण का सिलसिला जारी है। ऐसे में जिले की सड़कों पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। दूसरी ओर, सड़कों के बार-बार क्षतिग्रस्त होने और मरम्मत की आवश्यकता ने उनकी गुणवत्ता, निर्माण मानकों तथा टिकाऊपन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सड़क निर्माण के लिए निर्धारित तकनीकी मानकों के तहत सड़क की श्रेणी, निर्माण सामग्री और भारवहन क्षमता का ध्यान रखा जाता है। इसी आधार पर विभिन्न प्रकार के वाहनों के आवागमन के लिए सड़कें तैयार की जाती हैं। कोरबा जिले में डब्ल्यूडीएम, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, मुख्यमंत्री सड़क विकास परियोजना और राष्ट्रीय राजमार्ग जैसी सड़कें यातायात व्यवस्था का प्रमुख आधार हैं। वहीं, भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण कार्य भी जारी है। इन मार्गों से यात्री परिवहन के साथ-साथ कोयला, औद्योगिक सामग्री और अन्य वस्तुओं की ढुलाई होती है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कोरबा जिले में भारी वाहनों की संख्या 11,685 बताई गई है। इनमें साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित भारी वाहन, ट्रेलर, जेसीबी, हाइड्रा और अन्य व्यावसायिक वाहन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, जिले में हल्के वाहनों की संख्या 2,813 बताई गई है, जबकि विभिन्न मार्गों पर संचालित तथा स्कूलों से संबंधित बसों की संख्या 320 है। हालांकि, इन श्रेणियों के आंकड़ों और कुल पंजीकृत वाहनों के आंकड़े के बीच अंतर को देखते हुए संबंधित विभाग से आंकड़ों की पुष्टि आवश्यक है।

जिले की सड़कों पर केवल स्थानीय वाहनों का ही दबाव नहीं है। कोयला परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों के कारण दूसरे क्षेत्रों से आने-जाने वाले वाहनों की आवाजाही भी बनी रहती है। भारी वाहनों की निरंतर आवाजाही सड़क की सतह पर अतिरिक्त दबाव डालती है। हालांकि, सड़कें समय से पहले खराब होने के लिए केवल यातायात का दबाव ही जिम्मेदार नहीं है। निर्माण की गुणवत्ता, जल निकासी, रखरखाव और निर्धारित भारवहन क्षमता का पालन भी सड़क की उम्र तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कोरबा में हर साल डामर और कंक्रीट से सड़कों की मरम्मत तथा सुधार के कार्य किए जाते हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर सड़कें दोबारा खराब होने लगती हैं। ऐसे में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, ठेके की शर्तों के पालन और मरम्मत पर खर्च होने वाली राशि के प्रभावी उपयोग की समीक्षा जरूरी है। यदि सड़कों का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हो और समय पर रखरखाव किया जाए, तो उनकी उपयोगिता और टिकाऊपन बढ़ाया जा सकता है। बढ़ते वाहन दबाव के बीच कोरबा की सड़कें कितनी मजबूत और टिकाऊ साबित होती हैं, यह आने वाले समय में निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कसौटी होगी।

Related Articles

Back to top button