Chhattisgarh

KORBA : साजापानी के जंगल में जन्मे हाथी के बच्चे की सात गांवों के ग्रामीण मनाएंगे छठी

कोरबा, 24 अक्टूबर। हाथी-मानव द्वंद्व की घटनाओं के बीच कोरबा जिले के करतला विकासखंड के साजापानी जंगल से इंसान और वन्यजीवों के बीच आस्था, विश्वास और सह-अस्तित्व की अनूठी मिसाल सामने आई है। यहां 20 अक्टूबर को एक हथिनी ने बच्चे को जन्म दिया। अब इस नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में सात गांवों के ग्रामीण 25 अक्टूबर को छठी मनाने की तैयारी कर रहे हैं। इंसानी बच्चों के जन्म पर निभाई जाने वाली परंपरा को जंगल में जन्मे हाथी के बच्चे के लिए अपनाने की यह पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

साजापानी जंगल में जिस स्थान पर हथिनी ने बच्चे को जन्म दिया, उसके पास एक पेड़ के नीचे खुले में मां कांशीरानी की मूर्ति स्थापित है। स्थानीय ग्रामीणों की इस स्थान से गहरी आस्था जुड़ी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की मौजूदगी से जिले के कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित होता है, लेकिन उनके गांव और आसपास के इलाके में अब तक हाथियों ने किसी ग्रामीण, उसके घर या खेत को नुकसान नहीं पहुंचाया है। हाथियों के प्रति इसी आत्मीय जुड़ाव ने नन्हे हाथी के जन्म को सामूहिक उत्सव में बदल दिया है।

हाथियों की आवाजाही के कारण जिले के कई गांवों में फसलों, मकानों और लोगों की सुरक्षा को लेकर चुनौतियां बनी रहती हैं। ऐसे माहौल में सात गांवों के ग्रामीणों का हाथी के बच्चे की छठी मनाने का निर्णय वन्यजीवों के प्रति उनके अलग नजरिये को दर्शाता है। यह आयोजन बताता है कि इंसान और वन्यजीवों का रिश्ता केवल संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि आस्था, स्थानीय अनुभव और विश्वास भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मां कांशीरानी नवयुवक सेवा समिति, साजापानी ने इस आयोजन में छह अन्य गांवों जामपानी, पहाड़गांव, रामभांठा, लबेद, घुईचुआ और काशीपानी के ग्रामीणों को भी सहभागी बनाया है। समिति ने सभी से अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग देने की अपील की है। ग्रामीण कोई पांच से 20 रुपये तक दे रहे हैं, तो कुछ लोग दो मुट्ठी चावल अथवा अपनी क्षमता के अनुसार अधिक अनाज देकर आयोजन की तैयारियों में योगदान कर रहे हैं।

आयोजन को पारंपरिक स्वरूप देने के लिए समिति ने छठी का निमंत्रण पत्र भी छपवाया है, जिसे गांवों में वितरित किया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर दाल, चावल और सब्जी का सादा भंडारा रखा जाएगा।

समिति के अध्यक्ष बोधन चौहान ने बताया कि ग्रामीण अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक और अनाज के रूप में सहयोग कर रहे हैं। समिति का उद्देश्य इस खुशी को केवल एक गांव तक सीमित न रखकर आसपास के गांवों के साथ साझा करना है। वहीं, कोरबा वन मंडल के एसडीओ मणिकांत कश्यप ने बताया कि ग्रामीणों की ओर से आयोजन के लिए निमंत्रण मिला है।

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