कोरबा में मंत्री लखन लाल देवांगन ने किया पुस्तक ‘99 से 100 डिग्री तक’ का विमोचन

कोरबा,12 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य एवं उद्योग तथा श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कोहड़िया स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में बालको, कोरबा निवासी लेखक रूपेश श्रीवास्तव की प्रेरणादायी पुस्तक ‘99 से 100 डिग्री तक’ का विमोचन किया। इस अवसर पर कोरबा की महापौर संजू देवी राजपूत भी उपस्थित रहीं। पुस्तक में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयासों के माध्यम से सफलता प्राप्त करने का संदेश दिया गया है।
पुस्तक ‘99 से 100 डिग्री तक’ का मुख्य उद्देश्य पाठकों को जीवन में अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने तथा कठिन परिस्थितियों में भी प्रयास जारी रखने के लिए प्रेरित करना है। लेखक ने अपनी पुस्तक के माध्यम से यह विचार प्रस्तुत किया है कि सफलता अचानक मिलने वाली उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत, धैर्य और छोटे-छोटे प्रयासों का परिणाम होती है। पुस्तक पाठकों को अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखने, चुनौतियों का सामना करने और अपने सपनों को साकार करने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देती है।
पुस्तक विमोचन के अवसर पर लेखक रूपेश श्रीवास्तव ने मंत्री लखन लाल देवांगन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मंत्री से आत्मीय भेंट करने और उनके हाथों अपनी पुस्तक का विमोचन होना उनके लिए गौरव एवं प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने पुस्तक के विमोचन के लिए समय देने तथा प्रोत्साहित करने के लिए मंत्री का धन्यवाद किया। साथ ही, कार्यक्रम में महापौर संजू देवी राजपूत की उपस्थिति के लिए भी आभार जताया।

रूपेश श्रीवास्तव भारत एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) में डेटा एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। अपने पेशेवर दायित्वों के साथ-साथ साहित्य और लेखन में उनकी रुचि उन्हें प्रेरणादायी विषयों पर लिखने के लिए प्रोत्साहित करती है। उनकी पुस्तक ‘99 से 100 डिग्री तक’ का उद्देश्य पाठकों में आत्मविश्वास बढ़ाना, सकारात्मक सोच विकसित करना और उन्हें अपने निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देना है।
कोरबा के लेखक रूपेश श्रीवास्तव की यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी संदेश प्रस्तुत करती है, जो व्यक्तिगत विकास, आत्मविश्वास और सफलता की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। पुस्तक का संदेश है कि लक्ष्य के करीब पहुंचने के लिए अंतिम प्रयास भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना शुरुआत में किया गया प्रयास। निरंतरता, धैर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ व्यक्ति अपनी क्षमताओं को बेहतर दिशा दे सकता है।




