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जंतर-मंतर पार्ट-2 पर सस्पेंस बरकरार, 10 अक्टूबर के CJP प्रदर्शन को अनुमति नहीं

दिल्ली में कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) एक बार फिर प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर CJP की ओर से दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को जानकारी दी गई है और पुलिस से इसका एक्नॉलेजमेंट भी मिल गया है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। संसद मार्ग थाने के बाहर CJP नेता सौरव दास ने कहा कि यह केवल CJP का प्रदर्शन नहीं होगा, बल्कि इसे Gen-Z प्रोटेस्ट के तौर पर आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाए जाने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

नई दिल्ली इलाके में फिलहाल भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है। ऐसे में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस क्या फैसला लेती है, इस पर नजर बनी हुई है। प्रदर्शन की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस की आगे की कार्रवाई अहम मानी जा रही है।

3 अक्टूबर को CJP के प्रदर्शन के दौरान विवाद सामने आया। तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर कथित यौन उत्पीड़न और बदसलूकी के आरोप लगाए। शिकायतें मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे क्राइम ब्रांच को भेज दिया।

पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों ने थाने के बाहर दिया धरना मामले को लेकर पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग थाने के बाहर धरना दिया और FIR दर्ज करने की मांग की। इस दौरान पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया। इसी मामले में ACP विवेक भगत का नाम भी सामने आया। बाद में उन्होंने कथित शिकायतों की जांच पूरी होने तक एडिशनल DCP का करंट ड्यूटी चार्ज नहीं लेने की इच्छा जताई। इसके बाद दिल्ली सरकार ने उनके मामले में आदेश में बदलाव किया।

10 अक्टूबर के प्रदर्शन पर पुलिस के फैसले पर नजर अब CJP 10 अक्टूबर को एक बार फिर प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है। संगठन इसे Gen-Z प्रोटेस्ट के तौर पर आयोजित करने की बात कह रहा है। वहीं, नई दिल्ली इलाके में लागू BNSS की धारा 163 और पिछले प्रदर्शनों से जुड़े घटनाक्रम को देखते हुए 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस के अगले फैसले पर नजर बनी हुई है।

CJP के प्रदर्शनों का दिल्ली में पहले भी विवादों से जुड़ा रिकॉर्ड रहा है। जुलाई में संगठन के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। इस दौरान बैरिकेड तोड़े जाने के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। घटना में कई पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की बात सामने आई थी। जुलाई में हुए घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस ने कई FIR दर्ज की थीं। बाद में पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वह जुलाई में CJP के प्रदर्शनों से संबंधित 13 FIR पर आगे कार्रवाई नहीं करना चाहती। अब 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए पिछले घटनाक्रम और मौजूदा प्रतिबंधों के बीच पुलिस की तैयारियों पर नजर बनी हुई है।

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