Chhattisgarh

KORBA:पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 4 में गूंजे शास्त्रीय संगीत के सुर, विद्यार्थियों ने सीखी सुर-ताल की बारीकियां

कोरबा, 7 अक्टूबर 2026। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 4, कोरबा में मंगलवार को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत गायन पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा से परिचित कराते हुए गायन की बुनियादी बारीकियों, सुर, लय और ताल का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना था। कार्यशाला के दौरान विद्यालय परिसर शास्त्रीय संगीत के सुरों से गूंज उठा और विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ इसमें भाग लिया।

कार्यशाला में ‘रूट्स टू रूट’ से आए कलाकार पलाश आचार्जी ने विद्यार्थियों को हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन की विभिन्न बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने स्वर साधना, सुर की शुद्धता, लय और ताल के महत्व को सरल एवं रोचक तरीके से समझाया। विद्यार्थियों को गायन के दौरान सुरों पर नियंत्रण रखने तथा नियमित अभ्यास के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। इसके बाद विद्यार्थियों ने कलाकार के निर्देशन में गायन का अभ्यास किया और सुरों को साधने का प्रयास किया।

कार्यशाला में तबले पर अभिषेक भट्ट ने संगत की। तबले की प्रभावी संगति ने गायन को और अधिक जीवंत बना दिया। विद्यार्थियों को इस दौरान प्रत्यक्ष रूप से यह समझने का अवसर मिला कि शास्त्रीय गायन में स्वर, लय और वादन के बीच सामंजस्य किस प्रकार संगीत को पूर्णता प्रदान करता है। तबले की गूंज और विद्यार्थियों के स्वरों से विद्यालय का वातावरण पूरी तरह संगीतमय हो गया।

विद्यालय के प्राचार्य बी.एस. अहिरे ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों में संगीत के प्रति रुचि विकसित करने के साथ-साथ उन्हें भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। संगीत के अभ्यास से विद्यार्थियों में एकाग्रता, अनुशासन और रचनात्मकता का भी विकास होता है।

कार्यशाला में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कलाकारों के प्रति आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी इस तरह के आयोजन जारी रखने का आग्रह किया। विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक जी.आर. जांगड़े ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यशाला संयोजक ईश्वरी रजक, संचालक एस्तर कुमार, रितु सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने वातावरण को और भी सुरमय बना दिया। इस अवसर पर विद्यालय का परिसर मानो संगीत की पाठशाला में तब्दील हो गया, जहां नन्हे कंठों से निकले सुरों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुंदर छटा बिखेर दी।

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