बस्तर में पहली बार संभाग स्तरीय टाइगर प्रोटेक्शन कार्यशाला, वनकर्मियों को दिया बाघ संरक्षण और मॉनिटरिंग का प्रशिक्षण

रायपुर, 3 अक्टूबर 2026। वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह के अवसर पर बस्तर संभाग में पहली बार संभाग स्तरीय टाइगर प्रोटेक्शन कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन एवं निर्देशानुसार वन्यप्राणियों के संरक्षण, बाघों की प्रभावी मॉनिटरिंग और वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए आयोजित यह दो दिवसीय कार्यशाला वन विद्यालय, जगदलपुर में शुरू हुई। कार्यशाला का आयोजन कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मैदानी क्षेत्रों में तैनात वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाने के साथ उन्हें वन्यजीवों की पहचान और निगरानी की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराना है।
कार्यशाला में राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य गौरव निलानी और एसडीओ योगेश रात्रे ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से वनकर्मियों को बाघ संरक्षण और फील्ड मॉनिटरिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान बाघों की शारीरिक विशेषताओं, रहन-सहन, व्यवहार, क्षेत्र (टेरिटरी) की पहचान तथा उनके आवागमन से जुड़े संकेतों के बारे में विस्तार से बताया गया। इसके अलावा बाघ और तेंदुए के पगमार्क में अंतर, नर एवं मादा बाघ की पहचान, पगमार्क पैड इंप्रेशन और फोटोग्राफिक पहचान की तकनीक भी समझाई गई।
वनकर्मियों को बाघों के शिकार करने के तरीके, पेड़ों पर खरोंच के निशान, क्षेत्रीय मार्किंग तथा अन्य फील्ड साइन्स की पहचान का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही कैमरा ट्रैप के माध्यम से वन्यजीवों की निगरानी, मैदानी स्तर पर मॉनिटरिंग की आधुनिक तकनीकों, वन्यजीव अपराधों की रोकथाम और मुखबिर तंत्र को मजबूत करने के उपायों पर भी जानकारी दी गई।
कार्यशाला के पहले दिन सैद्धांतिक प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों की परीक्षा आयोजित कर उनके ज्ञान का आकलन किया गया। दूसरे दिन प्रतिभागियों को फील्ड विजिट और प्रैक्टिकल एक्सरसाइज के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान वनकर्मी जंगल में जाकर पगमार्क सहित वन्यजीवों की मौजूदगी के अन्य संकेतों की पहचान और उनका रिकॉर्ड तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
कार्यशाला में मुख्य वन संरक्षक, बस्तर स्टाइलो मंडावी, मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) उत्तम गुप्ता, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक गौतम नारायण पड़ीभार सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। बस्तर संभाग में पहली बार आयोजित यह कार्यशाला वन्यजीव संरक्षण और बाघों की वैज्ञानिक मॉनिटरिंग के लिए मैदानी अमले की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।




