डॉ. राधाबाई कन्या महाविद्यालय में 300 छात्राओं को यातायात नियमों और सिविक सेंस का पाठ, एसीपी ट्रैफिक सीमा आहिरवार ने दिलाया सड़क सुरक्षा का संदेश

- यातायात जागरूकता कार्यक्रम में जिम्मेदार नागरिक व्यवहार पर जोर, नियमों का पालन करने और सड़क सुरक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी मानने की अपील
रायपुर, 30 सितम्बर। डॉ. राधाबाई कन्या महाविद्यालय में यातायात जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की लगभग 300 छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान एसीपी ट्रैफिक सीमा आहिरवार ने छात्राओं को यातायात नियमों के पालन के साथ-साथ सिविक सेंस, जिम्मेदार नागरिक व्यवहार और सड़क सुरक्षा के महत्व की जानकारी दी।
कार्यक्रम में एसीपी ट्रैफिक ने कहा कि केवल कानून और नियम बना देने से कोई देश विकसित नहीं बनता। किसी भी समाज के विकास के लिए नागरिकों में नियमों के प्रति स्वअनुशासन, जिम्मेदारी और सिविक सेंस का होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में लोग यातायात नियमों का पालन केवल पुलिस के डर से नहीं करते, बल्कि अपनी और दूसरे लोगों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी समझते हुए नियमों का पालन करते हैं।
उन्होंने छात्राओं को समझाया कि विकासशील से विकसित राष्ट्र बनने की प्रक्रिया केवल सड़कों, वाहनों और तकनीक के विकास से पूरी नहीं हो सकती। इसके लिए नागरिकों की सोच और व्यवहार में भी सकारात्मक बदलाव जरूरी है। सड़क पर लेन का पालन करना, पैदल यात्रियों को रास्ता देना, दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और कार में सीट बेल्ट का उपयोग करना, अनावश्यक हॉर्न से बचना और यातायात नियमों का स्वेच्छा से पालन करना जिम्मेदार नागरिक व्यवहार के उदाहरण हैं।
एसीपी ट्रैफिक ने छात्राओं से सड़क पर स्वयं यातायात नियमों का पालन करने के साथ परिवार और आसपास के लोगों को भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सड़क पर छोटी-छोटी सावधानियां दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

कार्यक्रम के दौरान मैत्री और आपसी सहयोग की भावना के साथ सड़क सुरक्षा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। छात्राओं को बताया गया कि यातायात सुरक्षा केवल पुलिस या यातायात विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के आयोजन में लायंस क्लब की महत्वपूर्ण भूमिका रही। क्लब के सहयोग से छात्राओं तक यातायात सुरक्षा और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार का संदेश प्रभावी तरीके से पहुंचाया गया। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि जब नागरिक यातायात नियमों को मजबूरी के बजाय अपनी जिम्मेदारी समझकर अपनाएंगे, तभी सुरक्षित सड़कों, अनुशासित नागरिकों और विकसित समाज की दिशा में आगे बढ़ना संभव होगा।




