कोरबा में स्क्रब टाइफस को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ाई निगरानी

कोरबा, 22 सितम्बर 2026। जिले में स्वाइन फ्लू के लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच अब स्क्रब टाइफस को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। पड़ोसी जिलों में स्क्रब टाइफस के मामले सामने आने के बाद कोरबा जिले के ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने मैदानी अमले को बीमारी के लक्षणों पर नजर रखने और ग्रामीणों को इससे बचाव के उपायों की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, कोरबा जिले में अब तक स्क्रब टाइफस का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पड़ोसी जिले अंबिकापुर में पिछले दिनों स्क्रब टाइफस के मामले सामने आए थे। वहीं जांजगीर-चांपा जिले में भी लगातार नए मामले सामने आने के साथ एक मरीज की मौत की जानकारी सामने आई है। इसके बाद कोरबा जिले में भी स्वास्थ्य विभाग ने विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। खासकर पड़ोसी जिलों से लगे ग्रामीण एवं सीमावर्ती इलाकों में स्वास्थ्य अमले को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉक्टरों के अनुसार स्क्रब टाइफस एक जीवाणु जनित बीमारी है, जो मुख्य रूप से संक्रमित चिगर के काटने से होती है। चिगर बेहद छोटे आकार के सूक्ष्म कीड़े होते हैं, जो आमतौर पर घास, झाड़ियों, खेतों और नमी वाले स्थानों में पाए जाते हैं। इनके काटने के बाद बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर संक्रमण पैदा कर सकता है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है।
खेतों और जंगलों में काम करने वाले लोगों के साथ मवेशी चराने वाले तथा घास और झाड़ियों वाले क्षेत्रों में जाने वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से ऐसे स्थानों पर जाते समय शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनने और संभव हो तो नंगे पैर नहीं चलने की सलाह दी है। घर के आसपास घास एवं झाड़ियों को नहीं बढ़ने देने तथा आवश्यकतानुसार कीटनाशक का छिड़काव करने की भी अपील की गई है। खेत या जंगल से लौटने के बाद अच्छी तरह स्नान करने और कपड़ों को साफ करने की सलाह दी गई है। तेज बुखार, कमजोरी, शरीर पर दाने या काटने के स्थान पर काला निशान दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेने को कहा गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएन केशरी ने बताया कि कोरबा जिले में अब तक स्क्रब टाइफस का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, पड़ोसी जिलों में मामले मिलने के कारण स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट है। ग्रामीण क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है तथा मैदानी स्वास्थ्य अमले द्वारा लोगों को बीमारी के लक्षण और बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।
इधर, जिले में स्वाइन फ्लू के अब तक कुल 30 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 23 मरीज उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि वर्तमान में सात एक्टिव केस हैं, जिनका उपचार जारी है। स्वास्थ्य विभाग स्वाइन फ्लू के साथ-साथ अब स्क्रब टाइफस को लेकर भी सतर्कता बरत रहा है।




