बिजली कटौती से पंचायतें अंधेरे में, बिजली बिल समाधान योजना में शामिल करने की मांग

वर्षों पुराने बकाये का बोझ वर्तमान पंचायतों पर डालना उचित नहीं, ब्याज माफ कर सुविधा देने की मांग
दुर्ग / जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बकाया बिजली बिल के चलते ग्राम पंचायत भवनों की बिजली काटे जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दुर्ग विकास खण्ड के अंडा क्षेत्र के रिसामा, चिरपोटी, मतवारी, अंडा, अछोटी, जंजगिरी, मचांदूर सहित लगभग 15 से 25 ग्राम पंचायत भवनों की बिजली आपूर्ति बकाया राशि के कारण बंद किए जाने की जानकारी सामने आई है। बिजली कटौती के कारण पंचायतों के नियमित एवं ऑनलाइन शासकीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
जनपद सदस्य व किसान नेता ढालेश साहू ने कहा कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। आज जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पेंशन, आवास, मनरेगा, राशन, विभिन्न पोर्टल एवं शासन की योजनाओं से संबंधित अधिकांश कार्य ऑनलाइन होते हैं। ऐसे में पंचायत भवनों की बिजली काट दिए जाने से ग्रामीणों को सीधे परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि अंडा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 01 में भी करीब एक सप्ताह से बिजली बंद होने से छोटे बच्चों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में शासकीय विभागों के हजारों बिजली कनेक्शनों पर बड़ी बकाया राशि लंबित है और इसमें ग्राम पंचायतों के कनेक्शन भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। श्री साहू ने कहा कि इन बकायों का बड़ा हिस्सा कई वर्षों से लंबित है। वर्तमान में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सामने वर्षों पुराने बिजली बिल को एकमुश्त जमा करने की स्थिति नहीं है। इसलिए समस्या का समाधान दंडात्मक कार्रवाई के बजाय व्यावहारिक वित्तीय व्यवस्था के माध्यम से किया जाना चाहिए।
श्री साहू ने कहा कि पंचायत भवनों की बिजली कटने के बाद यदि गांवों की स्ट्रीट लाइट और पेयजल व्यवस्था के मोटर पंप के कनेक्शन भी काटे गए तो ग्रामीण क्षेत्रों में अंधेरे और पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसी स्थिति बनने से पहले शासन और संबंधित विभाग को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि दुर्ग जिले की सभी ग्राम पंचायतों को ऊर्जा विभाग की बिजली बिल समाधान योजना (OTS) में शामिल किया जाए, वर्षों से लंबित बकाया पर ब्याज एवं अधिभार में राहत दी जाए, मूल राशि को शासन द्वारा जमा करने की सुविधा दी जाए तथा समाधान होने तक पंचायत भवनों की बिजली आपूर्ति बहाल रखी जाए।




