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दुश्मन पर अंतरिक्ष से होगा वार, अमेरिका ने स्पेस में तैनात किया हथियार

नईदिल्ली,16 सितंबर । जमीन, हवा और समुद्र के बाद अब अमेरिका अंतरिक्ष में भी अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। अमेरिकी वायुसेना सचिव ट्राय मींक ने पहली बार सार्वजनिक रूप से बताया है कि अमेरिका ने अंतरिक्ष की कक्षा में ऐसी आक्रामक क्षमता तैनात की है, जिसका इस्तेमाल दुश्मन के अंतरिक्ष तंत्र को बाधित करने, कमजोर करने या जरूरत पड़ऩे पर नष्ट करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने इस हथियार की प्रकृति और उसकी वास्तविक क्षमता के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।

मैरीलैंड के नेशनल हार्बर में आयोजित एयर, स्पेस एंड साइबर सम्मेलन में मींक ने कहा कि ‘ऑन-आर्बिट’ हथियार अमेरिकी बलों को दुश्मन की ताकतों से बचाने के लिए जरूरी हैं। उनका स्पष्ट संकेत रूस और चीन की बढ़ती अंतरिक्ष सैन्य क्षमताओं की ओर था। अमेरिकी स्पेस फोर्स के मुताबिक इन प्रणालियों का इस्तेमाल हमले और बचाव दोनों के लिए किया जा सकता है। इनमें ऐसे सिस्टम भी शामिल हैं, जो किसी उपग्रह को नष्ट किए बिना उसकी गतिविधियों में रुकावट डाल सकते हैं। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, अमेरिका के इस खुलासे के बाद हथियार की प्रकृति को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सिक्योर वर्ल्ड फाउंडेशन की विक्टोरिया सैमसन ने कहा कि यह अंतरिक्ष आधारित जैमर हो सकता है। उनका कहना है कि अमेरिका आम तौर पर ऐसे सीधे हमलों से बचता रहा है, जिनसे अंतरिक्ष में बड़ी मात्रा में मलबा पैदा हो सकता है।

हालांकि, सेंटर फार स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के क्लेटन स्वोप के मुताबिक मींक की घोषणा इतनी अस्पष्ट है कि इससे वास्तविक खतरे का आंकलन करना मुश्किल है। रूस या चीन के लिए इसे प्रभावी चेतावनी बनाने के लिए हथियार की विनाशकारी क्षमता और इस्तेमाल की परिस्थितियों की कुछ जानकारी जरूरी होगी। यह घोषणा ट्रंप प्रशासन की ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा योजना के बीच हुई है। मींक ने बताया कि अमेरिका के पास अंतरिक्ष आधारित इंटरसेप्टर के लिए ‘फ्लाइट-रेडी हार्डवेयर’ मौजूद है। इनका उद्देश्य अंतरिक्ष में ही आने वाली मिसाइलों को रोकना है। अमेरिका के अनुसार चीन अंतरिक्ष और काउंटर-स्पेस क्षमताओं में तेजी से निवेश कर रहा है, जबकि रूस भी अंतरिक्ष को भविष्य के युद्ध का अहम क्षेत्र मानता है।

2024 में अमेरिका ने रूस पर ऐसा उपग्रह विकसित करने का आरोप लगाया था, जो दूसरे अंतरिक्ष यानों को निशाना बनाने में सक्षम हो सकता है। अमेरिकी कदम से अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ बढ़ऩे की आशंका भी जताई जा रही है। 1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी कक्षा में बड़े पैमाने पर विनाश करने वाले हथियारों की तैनाती पर रोक लगाती है, लेकिन पारंपरिक हथियारों या उपग्रहों को बाधित करने वाली प्रणालियों पर स्पष्ट प्रतिबंध नहीं लगाती। अमेरिकी स्पेस फोर्स का कहना है कि उसकी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप होंगी। मींक ने कहा कि बदलते रणनीतिक माहौल में अमेरिका के लिए हवा के साथ-साथ अंतरिक्ष में भी अपना प्रभुत्व बनाए रखना जरूरी है।

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