Chhattisgarh

स्नेह सदन वृद्धाश्रम में 4.91 लाख के 300 ‘बमरोधी कंबल’ की खरीद,! उठे सवाल?

कोरबा। क्या स्नेह सदन वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को किसी बम या विस्फोट से खतरा है? निश्चित रूप से इस सवाल का सामान्य जवाब नहीं होगा, लेकिन प्राप्त दस्तावेजों में वृद्धाश्रम के लिए 300 नग बमरोधी कंबल की आपूर्ति और इसके लिए 4 लाख 91 हजार 100 रुपए के भुगतान का उल्लेख सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर इनकी खरीद किस आवश्यकता और किस आधार पर की गई?

करीब दो वर्ष पूर्व समाज कल्याण विभाग द्वारा कोरबा में 60 सीटर स्नेह सदन वृद्धाश्रम प्रारंभ किया गया था। वृद्धाश्रम के संचालन के लिए विभिन्न आवश्यक सामग्रियों की खरीदी की गई। इसी खरीदी से संबंधित सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों की पड़ताल में बमरोधी कंबल की खरीदी का यह मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार के तहत उपलब्ध कराए गए बिल- चालान के अनुसार स्नेह सदन वृद्धाश्रम के लिए कुल 300 नग बमरोधी कंबल की आपूर्ति दर्शाई गई है। इसके लिए दो अलग- अलग बिलों के माध्यम से कुल 4 लाख 91 हजार 100 रुपए का भुगतान किया गया है। पहले बिल में 1,680 रुपये प्रति नग की दर से 240 नग बमरोधी कंबल की आपूर्ति दर्शाई गई है। इसकी कुल कीमत 4 लाख 3 हजार 200 रुपए है। वहीं दूसरे बिल में 1,465 रुपए प्रति नग की दर से 60 नग बमरोधी कंबल की आपूर्ति दिखाई गई है। इसकी कुल कीमत 87 हजार 900 रुपए है। दोनों बिल सरोज सिंघल एंड कंपनी, पावर हाउस रोड, कोरबा द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं।

बिल में गृह मंत्रालय के स्वीकृत विनिर्देश का उल्लेख

मामले को और महत्वपूर्ण बनाने वाली बात यह है कि आपूर्तिकर्ता सरोज सिंघल एंड कंपनी द्वारा जारी दोनों बिलों में उत्पाद के विवरण में सामान्य कंबल का उल्लेख नहीं है, बल्कि स्पष्ट रूप से ‘अनब्रांडेड बम ब्लैंकेट’ अर्थात बमरोधी कंबल लिखा गया है। इसके साथ ही उत्पाद को भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा स्वीकृत अथवा निर्धारित तकनीकी विनिर्देश के अनुसार बताया गया है। बिल में गृह मंत्रालय के संबंधित पत्र क्रमांक और 24 अगस्त 2015 की तारीख का भी उल्लेख किया गया है। इससे दस्तावेज में दर्ज विवरण के आधार पर यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि यदि आपूर्ति सामान्य कंबल की थी, तो बिल में उसे बमरोधी कंबल बताते हुए गृह मंत्रालय के तकनीकी विनिर्देश का उल्लेख क्यों किया गया?

बमरोधी कंबल का उपयोग सामान्य वृद्धाश्रम में क्यों?

बमरोधी कंबल एक विशेष सुरक्षा उपकरण होता है, जिसका उपयोग संदिग्ध विस्फोटक या विस्फोट की स्थिति में सुरक्षा के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य विस्फोट के दौरान उत्पन्न टुकड़ों, मलबे और उसके प्रभाव से आसपास मौजूद लोगों तथा संपत्ति को यथासंभव सुरक्षा प्रदान करना होता है। ऐसे विशेष सुरक्षा उपकरण का उपयोग सामान्य परिस्थितियों में संचालित वृद्धाश्रम में क्यों आवश्यक पड़ा, यह इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है।

विभाग का दावा- साधारण कंबल की हुई है खरीद

दस्तावेज सामने आने के बाद समाज कल्याण विभाग, कोरबा के उप संचालक हरीश सक्सेना तथा संबंधित लिपिक से इस संबंध में चर्चा की गई। उप संचालक का कहना था कि खरीदी गई वस्तु बमरोधी कंबल नहीं, बल्कि साधारण कंबल है, लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित रह गया। यदि वस्तु साधारण कंबल थी, तो आपूर्तिकर्ता के दोनों बिलों में उसे बमरोधी कंबल क्यों दर्शाया गया? साथ ही बिल में गृह मंत्रालय के पत्र क्रमांक और उसके द्वारा स्वीकृत तकनीकी विनिर्देश का उल्लेख किस आधार पर किया गया? इस संबंध में विभाग की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। सूचना का अधिकार के तहत कंबल की खरीद के लिए मंगाए गए दर प्रस्ताव, प्राक्कलन और खरीद से संबंधित अन्य दस्तावेजों की जानकारी भी मांगी गई थी, लेकिन उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं हो सका कि 300 कंबलों की आवश्यकता किस आधार पर निर्धारित की गई। इसी तरह सामग्री की आपूर्ति के बाद उसके भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया, सत्यापन करने वाले अधिकारी अथवा समिति तथा सामग्री को स्वीकार किए जाने से संबंधित अभिलेख भी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आए। यदि विभाग का कहना है कि खरीदी गई वस्तु सामान्य कंबल थी, तो उसका तकनीकी विवरण, खरीद का आधार, आवश्यकता का आकलन और आपूर्ति के बाद किए गए सत्यापन का अभिलेख सामने आना चाहिए।

60 सीटर वृद्धाश्रम में 300 कंबलों की आवश्यकता क्यों?

मामले में दूसरा बड़ा सवाल खरीदी गई मात्रा को लेकर है। स्नेह सदन वृद्धाश्रम की क्षमता 60 बुजुर्गों की है। इसके बावजूद यहां 300 नग कंबलों की खरीद दर्शाई गई है। वृद्धाश्रम शुरू होने के समय यहां रहने वाले बुजुर्गों की संख्या शून्य थी। उद्घाटन के दौरान दूसरे क्षेत्रों से कुछ बुजुर्गों को यहां लाया गया था। इसके बाद भी समय-समय पर बुजुर्गों का प्रवेश होता रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 17 माह की अवधि में 32 बुजुर्ग वृद्धाश्रम छोड़कर जा चुके हैं। ऐसे में 60 सीटर वृद्धाश्रम के लिए 300 नग कंबलों की आवश्यकता किस आधार पर तय की गई, यह भी जांच का विषय है। यदि साधारण कंबल थे तो 300 नग खरीदने का आधार क्या था?

आपूर्तिकर्ता से संपर्क का प्रयास भी विफल

मामले को और स्पष्ट करने के लिए सरोज सिंघल एंड कंपनी के बिल में दर्ज मोबाइल क्रमांक पर लगातार चार दिनों तक संपर्क करने का प्रयास किया गया, मोबाइल बंद मिला। ऐसे में इस खरीद को लेकर विभागीय पक्ष और दस्तावेजों में दर्ज विवरण के बीच अंतर दिखाई देता है।

विसंगति की निष्पक्ष जांच जरूरी

यह मामला केवल बमरोधी कंबल शब्द के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। इसमें खरीद की आवश्यकता, वस्तु की वास्तविक प्रकृति, गृह मंत्रालय के तकनीकी विनिर्देश का उल्लेख, वस्तु का वर्गीकरण, 300 नग की मात्रा, खरीद प्रक्रिया, आपूर्ति के बाद सत्यापन और भुगतानकृसभी बिंदुओं की जांच आवश्यक है। यदि वास्तव में सामान्य कंबल की खरीद की गई थी तो बिल में बमरोधी कंबल और गृह मंत्रालय के तकनीकी विनिर्देश का उल्लेख क्यों किया गया, इसका स्पष्ट उत्तर सामने आना चाहिए। वहीं यदि दस्तावेजों में दर्ज विवरण के अनुसार वास्तव में बमरोधी कंबल ही खरीदे गए थे, तो 60 सीटर वृद्धाश्रम में 300 नग ऐसे विशेष सुरक्षा उपकरणों की आवश्यकता और उपयोगिता का आधार भी सार्वजनिक होना चाहिए। दस्तावेजों में सामने आई इस विसंगति की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल बिल में दर्ज विवरण की त्रुटि है, वस्तु के वर्गीकरण से जुड़ा मामला है या खरीद प्रक्रिया में किसी अन्य प्रकार की अनियमितता हुई है।

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