रात के अंधेरे में लगाए जा रहे अवैध होर्डिंग, नगर निगम के नियमों पर सवाल; सौंदर्यीकरण पर पड़ रहा असर

कोरबा। शहर में एक ओर नगर पालिक निगम द्वारा चौक-चौराहों और प्रमुख मार्गों के सौंदर्यीकरण पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति टेंट, बांस-बल्ली, बैनर और होर्डिंग लगाए जाने का मामला सामने आया है। टीपी नगर चौक और सुनालिया पुल के अंधे मोड़ सहित अन्य स्थानों पर रात के समय इस तरह की गतिविधियां किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि नगर निगम के पास अवैध विज्ञापन और होर्डिंग को लेकर स्पष्ट नियम तथा कार्रवाई का प्रावधान पहले से मौजूद है।
नगर निगम से संबंधित उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, शासकीय भूमि पर विज्ञापन होर्डिंग लगाने के लिए निर्धारित नियमों के तहत अधिकृत व्यवस्था की गई है। दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि विज्ञापन प्रदर्शन के लिए अधिकृत जोन में निर्धारित एजेंसी के माध्यम से ही विज्ञापन किया जा सकता है। इसके बावजूद यदि सार्वजनिक स्थानों, सड़क किनारे, बिजली के पोल अथवा अन्य स्थानों पर बिना अनुमति बांस-बल्ली खड़ी कर विज्ञापन बोर्ड, बैनर, पोस्टर या होर्डिंग लगाए जाते हैं, तो यह निर्धारित नियमों का उल्लंघन माना गया है।
2012 के नियमों में अवैध विज्ञापन पर कार्रवाई का प्रावधान
छत्तीसगढ़ राजपत्र में 7 अगस्त 2012 को प्रकाशित विज्ञापन संबंधी उप-विधियों में अवैध विज्ञापन को बढ़ावा देने अथवा होर्डिंग का अवैध प्रदर्शन किए जाने को गंभीरता से लिया गया है। उपलब्ध दस्तावेज में स्पष्ट उल्लेख है कि अवैध रूप से विज्ञापन को बढ़ावा देना तथा होर्डिंग का अवैध प्रदर्शन अधिनियम की धारा 248 के निबंधनों के अंतर्गत अपराध होगा तथा धारा 434 के निबंधन के तहत दंडनीय होगा।
इसी प्रावधान में यह भी कहा गया है कि आवश्यकता होने पर अवैध विज्ञापनकर्ताओं तथा उन्हें प्रोत्साहन देने वालों के विरुद्ध पुलिस के पास प्राथमिकी अथवा संबंधित सक्षम प्राधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यानी नियम केवल होर्डिंग हटाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई का भी रास्ता खुला है।
नगर निगम के 2025 के प्रस्ताव में भी सख्ती
नगर पालिक निगम कोरबा के मेयर इन काउंसिल की 29 अगस्त 2025 की बैठक से संबंधित दस्तावेज में सार्वजनिक एवं शासकीय भूमि पर बिना अनुमति लगाए जाने वाले विज्ञापन होर्डिंग को लेकर कार्रवाई और जुर्माने का प्रस्ताव दर्ज है। इसमें कहा गया है कि बिना अनुमति लगाए गए विज्ञापन एवं होर्डिंग को 24 घंटे के भीतर हटाना होगा। निर्धारित अवधि में नहीं हटाने पर संबंधितों के विरुद्ध प्रतिदिन जुर्माना लगाने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
दस्तावेज के अनुसार, ऐसे मामलों में प्रति दिवस 500 रुपये, टूटे होर्डिंग पर 1,000 रुपये तथा विद्युत पोल पर लगाए गए प्रत्येक होर्डिंग/बोर्ड पर 200 रुपये की दर से अर्थदंड का उल्लेख किया गया है। साथ ही अवैध रूप से लगाए गए विज्ञापन होर्डिंग को बिना किसी अन्य सूचना के जब्त किए जाने और संबंधित मामले को मेयर इन काउंसिल के समक्ष कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किए जाने का भी उल्लेख है।
समितियों और टेंट संचालकों की भूमिका पर भी सवाल
शहर में धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान टेंट तथा प्रचार सामग्री लगाए जाने की परंपरा है। लेकिन यदि किसी गणेश समिति, विश्वकर्मा समिति या अन्य संगठन द्वारा सार्वजनिक चौक-चौराहों पर बिना अनुमति बांस-बल्ली, बैनर अथवा होर्डिंग लगाए जाते हैं, तो नियम सभी के लिए समान रूप से लागू होने चाहिए। खासकर ऐसे स्थानों पर जहां यातायात अधिक है या मोड़ होने के कारण दृश्यता सीमित रहती है, वहां अस्थायी ढांचे सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय बन सकते हैं।
टीपी नगर चौक और सुनालिया पुल के अंधे मोड़ जैसे स्थानों पर इस तरह की गतिविधियों को लेकर नगर निगम से प्रभावी निगरानी और तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है। सवाल यह भी है कि जब निगम के पास अवैध होर्डिंग हटाने, जुर्माना लगाने और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई करने के स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं, तो इनका प्रभावी पालन कब होगा?
शहरवासियों का कहना है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर किए जा रहे कार्य तभी सार्थक होंगे, जब चौक-चौराहों और प्रमुख मार्गों पर अनधिकृत विज्ञापन सामग्री पर भी सख्ती से रोक लगे। नियम किसी समिति, संस्था या विज्ञापनकर्ता के लिए अलग-अलग नहीं, बल्कि सभी के लिए समान रूप से लागू होने चाहिए।




