Chhattisgarh

वीतरागता और आत्म-विश्वास ही वास्तविक धर्म : मुनि आगम सागर

रायपुर, 04 सितंबर। मालवीय रोड स्थित दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में समयोपदेश वर्षायोग 2026 के तहत धर्म और अध्यात्म की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है। मुनि आगम सागर, मुनि पुनीत सागर, एलक धैर्य सागर और एलक स्वागत सागर के ससंघ सानिध्य में श्रद्धालुओं ने भव्य जिन-अभिषेक, शांतिधारा और आहारदान में भाग लिया।

आत्मा में स्थित होना ही निश्चय चारित्र

प्रातःकालीन धार्मिक कक्षा में मुनि आगम सागर ने तत्त्वार्थ सूत्र और छह ढाला जैसे जैन दर्शन के महत्वपूर्ण ग्रंथों का स्वाध्याय कराया। मंगल देशना में उन्होंने सम्यक् चारित्र, आत्म-कल्याण और कर्म सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए वीतरागता का संदेश दिया।

मुनिश्री ने कहा कि जो जीव बाहरी सांसारिक पदार्थों से ध्यान हटाकर अपनी आत्मा में स्थित हो जाता है, वही वास्तविक निश्चय चारित्र की ओर बढ़ता है। आत्म-तत्त्व पर सच्चा विश्वास ही उसे प्राप्त करने का पुरुषार्थ कराता है। आत्मा के वास्तविक कल्याण का मार्ग ही सम्यक् चारित्र है।

उन्होंने कहा कि ख्याति, लाभ, पूजा, भव्य भवन, वस्त्र और धन-संपदा की लालसा से ऊपर उठना जरूरी है। ख्याति, पूजा और लाभ केवल इच्छा करने से नहीं मिलते, बल्कि पूर्वकृत पुण्य कर्मों के उदय से प्राप्त होते हैं। वहीं ईर्ष्या, द्वेष और क्लेश के भाव कर्मों को मलिन करते हैं।

जैसी वस्तु है, उसे वैसा ही स्वीकार करें

मुनि आगम सागर ने तत्त्व-श्रद्धान पर जोर देते हुए कहा कि जीव को जीव और अजीव को अजीव मानना चाहिए। वस्तु के वास्तविक स्वरूप को उसी रूप में स्वीकार करने से पाप से बचा जा सकता है। इसके विपरीत गलत मान्यता पाप के बंध का कारण बनती है।

उन्होंने कहा कि जीवन में दो स्थानों पर बिना बुलाए भी जाना चाहिए। पहला, किसी की काठी यानी शव यात्रा में और दूसरा, जिनेन्द्र भगवान के दरबार में। प्रभु के दरबार में जाने से आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। श्रद्धा सम्यक् हो जाए तो मोक्ष की मंजिल दूर नहीं रहती।

ख्याति और लाभ की इच्छा आत्मा की व्याधि

मुनिश्री ने कहा कि ख्याति, पूजा और लाभ की इच्छा आत्मा की बड़ी व्याधि है। मोक्ष मार्ग का अपना निश्चित रास्ता है और सही दिशा में चलने वाला जीव ही सिद्धि की ओर बढ़ता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को बाहरी उपलब्धियों के बजाय आत्म-चिंतन और वीतरागता की ओर बढ़ने का संदेश दिया।

जिन-अभिषेक और विश्व शांति के लिए शांतिधारा

धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मूलनायक भगवान का भव्य जिन-अभिषेक और विश्व शांति के लिए वृहद शांतिधारा संपन्न हुई। त्रिकाल चौबीसी में भगवान विराजमान करने वाले सरिता जैन, श्रेयश जैन, रुचि जैन, वंशिका जैन और निर्वि जैन परिवार को मूलनायक भगवान के अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य मिला।

वहीं अभिषेक जैन, शालिनी जैन और सर्वम जैन परिवार ने भी मूलनायक भगवान के समक्ष शांतिधारा की।

मुनिराजों को नवधा भक्ति से कराया आहारदान

इसके बाद पूज्य मुनिराजों और एलकश्री की नवधा भक्ति पूर्वक आहारचर्या संपन्न हुई। मुनि आगम सागर और मुनि पुनीत सागर को आहारदान देने का सौभाग्य शकुंतला देवी-राजकुमार तथा कविता मोदी और नवीन मोदी को मिला।

एलक धैर्य सागर को रीता-निर्मल जैन तथा आशु जैन और नीरज जैन ने आहारदान दिया। वहीं एलक स्वागत सागर का आज व्रत का नियम रहा।

वर्षायोग समिति और सकल दिगम्बर जैन समाज, बड़ा मंदिर मालवीय रोड ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचकर जिन-अभिषेक, शांतिधारा, नवधा भक्ति के साथ मुनिराजों की आहारचर्या में शामिल होने और गुरुमुख से जिनवाणी का श्रवण करने का आह्वान किया।

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