जल जीवन मिशन: 11 हजार करोड़ खर्च, फिर भी कागजों पर ही नल, छत्तीसगढ़ देश में 23वें स्थान पर

रायपुर । जल जीवन मिशन तय समय-सीमा से पिछड़ गया है। मिशन की शुरुआत 15 अगस्त 2019 को हुई थी। इसका मूल लक्ष्य दिसंबर 2024 तक प्रदेश के करीब 50 लाख ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाना था। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर मिशन की समय-सीमा अब बढ़ाकर 2028 कर दी गई है। मार्च 2024 तक राज्य में योजना पर 11034 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुके थे।इसके बावजूद हर घर तक नियमित जलापूर्ति का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। राज्य में करीब 39 लाख यानी 78% ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन होने का दावा किया जा रहा है। लेकिन हाल में जारी कैग रिपोर्ट ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई गांवों को पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित किए बिना ही ‘हर घर जल’ घोषित कर दिया गया।
कई जगह नल और पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन लोगों को सातों दिन पानी नहीं मिल रहा है। बस्तर और सरगुजा के जनजातीय क्षेत्रों के साथ बालोद-दुर्ग जैसे भू-जल समस्या वाले इलाकों में भी जलस्रोतों की स्थिरता चुनौती बनी हुई है।55 एलपीसीडी से कम जलापूर्ति वाली योजनाएं और पंचायतों को योजनाओं के हस्तांतरण व भुगतान में देरी भी बड़ी समस्या है। अभी तक 78% कनेक्शन का आंकड़ा पाइप और नल बिछाने की प्रगति दिखाता है, लेकिन नियमित जलापूर्ति की स्थिति अब भी चुनौती है। इसी वजह है कि 11034 करोड़ खर्च के बावजूद छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय रैंकिंग में 23वें स्थान पर है।
33 में एक भी जिला 100% कवरेज नहीं कर पाया
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट मार्च 2024 को समाप्त अवधि की है। विधानसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2024 तक 33 जिलों या 146 विकासखंडों में सभी ग्रामीण परिवारों को शत-प्रतिशत क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराया जा सका। 18 जिलों में कवरेज 76 से 98 प्रतिशत है। इसमें धमतरी 98 प्रतिशत जबकि बलौदाबाजार में 76 प्रतिशत काम हुआ। शेष 15 जिलों में कवरेज 56 से 74 प्रतिशत के बीच रहा। गोवा देश का पहला राज्य जिसने 100% लक्ष्य हासिल किया। गुजरात, हरियाणा में भी प्रदर्शन अच्छा रहा।
हर घर नल से जल पहुंचाना अब कलेक्टरों की सीधी जिम्मेदारी होगी, योजना का भौतिक सत्यापन जरूरी
जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने के काम में अब कलेक्टरों को व्यक्तिगत रुचि लेकर मॉनिटरिंग करनी होगी। मुख्य सचिव विकासशील ने गुरुवार को महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में मिशन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने साफ कहा कि जल जीवन मिशन के कार्यों में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जिन योजनाओं का काम पूरा हो चुका है, उनका भौतिक सत्यापन कराया जाए। पंचायतों को हस्तांतरित योजनाओं के लंबित भुगतान भी जल्द निपटाए जाएं। जिन योजनाओं में जल स्रोत की समस्या है, उन्हें स्थानीय निधि से पूरा कराने के निर्देश दिए गए। जहां सब इंजीनियरों की कमी है, वहां दूसरे विभागों के इंजीनियरों की सेवाएं लेकर काम आगे बढ़ाया जाए। स्पष्ट आकलन, बेहतर योजना और विभागों के प्रभावी समन्वय से मिशन मोड में काम किया जाए, ताकि प्रदेश के प्रत्येक परिवार को समयबद्ध तरीके से नल से पानी मिल सके।




