Chhattisgarh

बालको की प्रगति में महिला इंजीनियरों की अहम भूमिका, तकनीकी दक्षता और नेतृत्व से बना रहीं नई पहचान

कोरबा, 14 अगस्त 2026। मैन्यूफैक्चरिंग और मेटल इंडस्ट्री में इंजीनियरिंग एवं तकनीकी भूमिकाओं को लंबे समय तक पुरुषों से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन बदलते दौर में महिला इंजीनियरों ने इस धारणा को पीछे छोड़ते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है। भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) में महिला इंजीनियर उत्पादन, प्रचालन, खनन और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभालते हुए कंपनी की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

आधुनिक मशीनों और तकनीक के बीच काम करने से लेकर टीमों का नेतृत्व करने तक, बालको की महिला इंजीनियर अपनी तकनीकी दक्षता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता के दम पर नई मिसाल कायम कर रही हैं। उनकी उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि कार्यक्षमता और सफलता किसी लैंगिक सीमा की मोहताज नहीं है।

आईपीएस एकेडमी, इंदौर से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने वाली अंशिका सिंह की रुचि शुरुआत से ही तकनीकी क्षेत्र में रही। बालको से जुड़ने के बाद उन्हें एल्यूमिनियम उद्योग के चुनौतीपूर्ण कास्ट हाउस में काम करने का अवसर मिला। यहां उन्होंने मेहनत, नवाचार और आत्मविश्वास के साथ अपनी पहचान बनाई।

अंशिका ने बताया कि शुरुआती दौर में शॉप फ्लोर पर खुद को साबित करना और सहकर्मियों का विश्वास हासिल करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। बालको में नए विचारों पर काम करने का अवसर और वरिष्ठ अधिकारियों का विश्वास उनके लिए प्रेरणा बना। प्रबंधन के सहयोग से उन्होंने ‘सम्मान एवं पुरस्कार’ पहल शुरू की, जिससे टीम के सदस्यों का उत्साह बढ़ा और बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद मिली।

आज अंशिका की पहचान शॉप फ्लोर पर एक महिला इंजीनियर के रूप में नहीं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और उपलब्धियों के आधार पर होती है। उनका मानना है कि कार्यस्थल पर आए सकारात्मक बदलाव भविष्य में इस क्षेत्र में कदम रखने वाली महिला इंजीनियरों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेंगे।

इसी तरह बालको में कार्यरत अरुणा ने एनआईटी सिक्किम से इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। कॉलेज के बाद सीधे प्लांट में काम शुरू करने को लेकर उनके मन में शुरुआती झिझक थी, लेकिन सहकर्मियों के सहयोग और वरिष्ठ अधिकारियों के विश्वास ने उनका आत्मविश्वास मजबूत किया। पिछले चार वर्षों में उन्होंने अपनी मेहनत और सीखने की ललक के जरिए कार्यस्थल पर मजबूत पहचान बनाई है।

अरुणा के नेतृत्व वाली टीम को बालको में बिजली के बैकअप सिस्टम को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी मिली। टीम ने पूरे सिस्टम को एससीएडीए के माध्यम से केंद्रीकृत किया। इससे विभिन्न प्रकार के डेटा की निगरानी और विश्लेषण के जरिए संभावित समस्याओं की समय रहते पहचान संभव हुई। इस तकनीकी पहल से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने और समय पर आवश्यक कदम उठाने में मदद मिली। इस महत्वपूर्ण योगदान के लिए अरुणा को प्लांट के सर्वोच्च सम्मान ‘सीईओ अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।

बालको की महिला इंजीनियरों की ये उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानियां नहीं हैं, बल्कि मैन्यूफैक्चरिंग और मेटल इंडस्ट्री में हो रहे सकारात्मक बदलाव की तस्वीर भी पेश करती हैं। तकनीकी दक्षता, नेतृत्व और आत्मविश्वास के साथ महिलाएं उन क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं, जिन्हें कभी मुख्य रूप से पुरुषों का कार्यक्षेत्र माना जाता था।

बालको में महिला इंजीनियरों की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि अवसर, विश्वास और अनुकूल कार्य वातावरण मिलने पर महिलाएं एल्यूमिनियम उत्पादन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ी की महिला इंजीनियरों को तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में नए सपने देखने तथा उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित कर रही है।

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