Chhattisgarh

कोरबा के बुका और गोल्डन आइलैंड में आदिवासी युवाओं को जलक्रीड़ा का प्रशिक्षण, गोवा से पहुंचे विशेषज्ञ


कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में जल पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। कटघोरा वन मंडल के अंतर्गत आने वाले जल विहार बुका और गोल्डन आइलैंड में स्थानीय आदिवासी युवाओं को जलक्रीड़ा और मोटर बोट संचालन का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। राष्ट्रीय जल क्रीड़ा संस्थान, गोवा के विशेषज्ञों की टीम द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण 10 दिनों तक चलेगा।


प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय जल क्रीड़ा संस्थान, गोवा से तीन विशेषज्ञ प्रशिक्षक मदन मोहन राव, सुरेंद्र कुमार और जगदीश पहुंचे हैं। प्रशिक्षकों द्वारा युवाओं को जलक्रीड़ा गतिविधियों के सुरक्षित संचालन के साथ मोटर बोट चलाने की तकनीक और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जा रही है।


बुका डैम क्षेत्र में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटन सीजन के दौरान यहां मोटर बोटिंग और अन्य जल गतिविधियों के प्रति पर्यटकों का आकर्षण बढ़ जाता है। ऐसे में जलक्रीड़ा के दौरान होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को रोकने और आपात स्थिति में तत्काल बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।


प्रशिक्षण में युवाओं को जल में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने, बचाव एवं राहत कार्य, जीवन रक्षक तकनीक, जलक्रीड़ा उपकरणों के सुरक्षित इस्तेमाल और मोटर बोट के सुरक्षित एवं तकनीकी संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक अभ्यास भी कराया जा रहा है।


मंडलाधिकारी कुमार निशांत ने बताया कि राष्ट्रीय जल क्रीड़ा संस्थान, गोवा के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य जल पर्यटन गतिविधियों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवाओं की उपलब्धता से पर्यटकों को बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी और जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित युवा तत्काल बचाव कार्य में योगदान दे सकेंगे।


दस दिवसीय प्रशिक्षण में कुल 38 प्रशिक्षणार्थी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें वन परिक्षेत्र एतमानगर अंतर्गत जल विहार बुका से 21, गोल्डन आइलैंड से 13 और जशपुर वन मंडल से 4 प्रशिक्षणार्थी शामिल हैं।


इस पहल से कोरबा के प्रमुख जल पर्यटन स्थलों बुका और गोल्डन आइलैंड में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही स्थानीय और आदिवासी युवाओं को जल पर्यटन से जुड़ा कौशल सीखने तथा भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर हासिल करने का रास्ता भी खुलेगा। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय युवाओं की भागीदारी भी बढ़ेगी।

Related Articles

Back to top button