Chhattisgarh

सिम्स के डॉक्टरों ने 6 वर्षीय मासूम की बचाई जान, अन्ननली में फंसा सिक्का सफल ऑपरेशन से निकाला

बिलासपुर, 16 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के ईएनटी (कान, नाक एवं गला) विभाग के चिकित्सकों ने त्वरित कार्रवाई और विशेषज्ञता का परिचय देते हुए छह वर्षीय बालक की जान बचा ली। खेलते समय गलती से सिक्का निगल लेने के कारण उसकी अन्ननली में सिक्का फंस गया था। डॉक्टरों की टीम ने जटिल ऑपरेशन कर सिक्के को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। ऑपरेशन के बाद बालक पूरी तरह स्वस्थ है।

जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के कोटा तहसील अंतर्गत ग्राम सरगोंड निवासी छह वर्षीय नरेंद्र ने गुरुवार सुबह करीब 7 बजे खेलते समय गलती से सिक्का निगल लिया। इसके बाद उसे कुछ भी निगलने में गंभीर परेशानी होने लगी। परिजन तत्काल उसे पेंड्रा के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया गया।

शाम करीब 6.30 बजे बालक के सिम्स पहुंचते ही चिकित्सकों की टीम सक्रिय हो गई। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने एक्स-रे के माध्यम से अन्ननली के ऊपरी हिस्से में फंसे सिक्के की सटीक स्थिति का पता लगाया। इसके बाद एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति की टीम ने बालक को सामान्य एनेस्थीसिया दिया।

ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरती पाण्डेय एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सकों ने रिजिड इसोफैगोस्कोपी तकनीक का उपयोग करते हुए अत्यंत सावधानी से सिक्के को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के संपन्न हुई और ऑपरेशन के बाद बालक की स्थिति सामान्य एवं संतोषजनक बताई गई।

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस सफलता पर चिकित्सकों की टीम की सराहना करते हुए कहा कि रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और ईएनटी विभागों के बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के कारण इस चुनौतीपूर्ण मामले का समय रहते सफल उपचार संभव हो सका।

वहीं, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने अभिभावकों से अपील की कि छोटे बच्चों की पहुंच से सिक्के, बटन, बैटरी, चुंबक और अन्य छोटी वस्तुएं दूर रखें। यदि बच्चा गलती से ऐसी कोई वस्तु निगल ले और उसे लार टपकना, गले में दर्द, निगलने या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपचार करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ अस्पताल में चिकित्सकीय सहायता लें। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पाण्डेय ने भी समय पर उपचार को ऐसे मामलों में जीवनरक्षक बताया।

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