Chhattisgarh

कोरबा में बारिश के मौसम में पिकनिक का बढ़ा खतरा: देवपहरी, केंदई, सतरेंगा समेत पर्यटन स्थलों पर प्रशासन की चेतावनी, लापरवाही पड़ सकती है भारी

कोरबा, 13 जुलाई 2026। मानसून की बारिश ने कोरबा जिले के जलप्रपातों और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा दिया है। देवपहरी, परसखोला, केंदई, फुटहामुड़ा, सतरेंगा, नकिया सहित जिले के कई पिकनिक स्पॉट इन दिनों हरियाली और झरनों की मनमोहक छटा के कारण पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के मौसम में इन स्थलों पर घूमने के दौरान विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि तेज बहाव, फिसलन भरी चट्टानें और अचानक बढ़ता जलस्तर जानलेवा साबित हो सकता है।

प्रशासन के अनुसार बरसात के दौरान जलप्रपातों का जलस्तर कुछ ही मिनटों में तेजी से बढ़ सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बारिश का पानी अचानक नीचे पहुंचने से शांत दिखाई देने वाली जलधारा विकराल रूप ले लेती है। ऐसे में पानी के भीतर छिपी गहरी खाइयां, तेज बहाव, धारदार चट्टानें और फिसलन किसी भी छोटी सी लापरवाही को बड़े हादसे में बदल सकती हैं।

मानसून के दौरान बड़ी संख्या में लोग परिवार और दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने इन पर्यटन स्थलों पर पहुंचते हैं। कई लोग झरनों के बिल्कुल करीब जाकर सेल्फी लेने, वीडियो बनाने या पानी में उतरकर नहाने का जोखिम उठाते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसी लापरवाही कई बार जानलेवा साबित होती है और हर साल ऐसे हादसे सामने आते हैं।

बीते वर्षों में कोरबा जिले में कई दर्दनाक घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें छात्र, युवा और पर्यटक तेज बहाव में बह गए या चट्टानों के बीच फंस गए। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है। इन घटनाओं से सीख लेते हुए प्रशासन ने लोगों से प्रकृति की सुंदरता का आनंद सुरक्षित दूरी से लेने की अपील की है।

बारिश के मौसम में चट्टानों पर काई जम जाने से वे बेहद फिसलन भरी हो जाती हैं। कई स्थानों पर पानी के नीचे गहरे गड्ढे, सुरंगनुमा चट्टानें और तेज धाराएं होती हैं, जो बाहर से दिखाई नहीं देतीं। एक बार संतुलन बिगड़ने के बाद खुद को संभालना बेहद मुश्किल हो जाता है।

प्रशासन ने बताया कि जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। पुलिस, नगर सेना और एसडीआरएफ की टीमें लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं। इसके बावजूद कई पर्यटक चेतावनियों को नजरअंदाज कर प्रतिबंधित और जोखिम वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। दुर्घटना होने की स्थिति में बचाव दल पूरी कोशिश करता है, लेकिन तेज बहाव, लगातार बारिश और दुर्गम इलाकों के कारण हर बार समय पर रेस्क्यू संभव नहीं हो पाता।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि पिकनिक का मतलब केवल पानी में उतरना नहीं है। झरनों की खूबसूरती को सुरक्षित दूरी से निहारें, बारिश से धुले जंगलों का आनंद लें और परिवार के साथ सुरक्षित स्थान पर समय बिताएं। खतरनाक चट्टानों पर चढ़ने या तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।

प्रशासन ने सलाह दी है कि मौसम खराब होने या तेज बारिश की स्थिति में पिकनिक का कार्यक्रम स्थगित करें। किसी भी नदी या झरने में न उतरें, चेतावनी बोर्ड और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, फिसलन भरी चट्टानों पर सेल्फी लेने से बचें, बच्चों को अकेले पानी के पास न जाने दें तथा शराब या नशे की हालत में पर्यटन स्थलों पर बिल्कुल न जाएं। साथ ही प्राथमिक उपचार सामग्री, टॉर्च और मोबाइल अपने साथ रखें, वाहन सावधानी से चलाएं और अंधेरा होने से पहले घर लौट आएं। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में स्वयं जोखिम उठाने के बजाय तुरंत डायल-112 या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें।

प्रशासन ने यह भी अपील की है कि पर्यटन स्थलों की स्वच्छता बनाए रखें और प्लास्टिक, बोतलें तथा अन्य कचरा खुले में न फैलाएं। संदेश स्पष्ट है कि बरसात का मौसम प्रकृति की खूबसूरत सौगात जरूर है, लेकिन थोड़ी-सी लापरवाही जिंदगी भर का दर्द बन सकती है। इसलिए सुरक्षित रहें, परिवार को सुरक्षित रखें और पिकनिक से केवल अच्छी यादें लेकर लौटें, हादसे नहीं।

Related Articles

Back to top button