राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास के प्रयास लाए रंग, उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने शिवरीनारायण महाविद्यालय को दी बड़ी सौगात

शिवरीनारायण। शिवरीनारायण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। महामंडलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज के प्रयासों के बाद छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने श्री महन्त लाल दास कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, शिवरीनारायण में बीकॉम, बीएससी माइक्रोबायोलॉजी, बीएससी बायोटेक्नोलॉजी तथा एमए भूगोल के नवीन संकाय प्रारंभ करने की अनुमति प्रदान की है। इस निर्णय से अब क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
उच्च शिक्षा विभाग से मिली स्वीकृति के अनुसार शिक्षा सत्र 2026-27 से महाविद्यालय में बीकॉम के लिए 40 सीटों का नवीन संकाय, एमए भूगोल के लिए 25 सीटों का नवीन संकाय तथा बीएससी माइक्रोबायोलॉजी और बीएससी बायोटेक्नोलॉजी में 30-30 सीटों के अतिरिक्त विषय की मान्यता प्रदान की गई है। इससे स्थानीय विद्यार्थियों को आधुनिक और रोजगारपरक विषयों में अध्ययन का अवसर मिलेगा।
इस उपलब्धि के बाद महाविद्यालय परिवार, छात्र-छात्राओं और अभिभावकों में खुशी का माहौल है। लंबे समय से इन पाठ्यक्रमों की मांग की जा रही थी। अब इन विषयों की पढ़ाई शिवरीनारायण में ही उपलब्ध होने से विद्यार्थियों का समय और आर्थिक खर्च दोनों बचेंगे तथा ग्रामीण अंचल के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का लाभ मिलेगा।
महाविद्यालय को मिली इस महत्वपूर्ण स्वीकृति पर महामंडलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय क्षेत्र के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने अपने सहयोगियों के साथ उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा से उनके निवास पर सौजन्य भेंट की थी। इस दौरान क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विस्तार और नए संकायों की आवश्यकता पर चर्चा की गई थी। प्रतिनिधिमंडल में शिवरीनारायण मठ ट्रस्ट कमेटी के सदस्य सुखराम दास, मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव तथा हर्ष दुबे भी शामिल थे।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नए संकायों की शुरुआत से शिवरीनारायण और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे तथा क्षेत्र में शैक्षणिक विकास को नई गति मिलेगी।




