कोरबा में 24 घंटे अंधेरे में डूबी SECL की पंद्रह ब्लॉक कॉलोनी, बिजली-पानी संकट से कर्मचारियों में आक्रोश

कोरबा, 7 जुलाई 2026। देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में पहचान रखने वाले कोरबा में उस समय विडंबनापूर्ण स्थिति देखने को मिली, जब एसईसीएल (SECL) कोरबा क्षेत्र की पंद्रह ब्लॉक कॉलोनी लगभग 24 घंटे तक बिजली संकट से जूझती रही। सोमवार 6 जुलाई की दोपहर से मंगलवार 7 जुलाई की दोपहर तक बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित रहने से सैकड़ों कर्मचारियों और उनके परिवारों का जनजीवन प्रभावित हो गया। समाचार लिखे जाने तक भी बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने और समस्या के स्थायी समाधान को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई थी
लगातार बिजली आपूर्ति बाधित रहने से कॉलोनी में पेयजल संकट भी गहरा गया। बिजली नहीं होने के कारण पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई, जिससे लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक दिक्कत बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को हुई। गर्मी और उमस के बीच घंटों तक बिजली नहीं रहने से लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
कॉलोनीवासियों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों की लापरवाही और समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण समस्या लंबे समय तक बनी रही। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद बिजली आपूर्ति बहाल करने में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई, जिससे लोगों में एसईसीएल प्रबंधन के प्रति नाराजगी बढ़ती गई।
स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि जिस क्षेत्र के कर्मचारी दिन-रात कठिन परिस्थितियों में काम कर देश के विभिन्न ताप विद्युत संयंत्रों तक कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं और राष्ट्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं, उन्हीं कर्मचारियों के परिवारों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यह स्थिति एसईसीएल की कॉलोनी प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
बिजली और पानी की समस्या से परेशान कॉलोनीवासियों ने एसईसीएल प्रबंधन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और कॉलोनियों की विद्युत व्यवस्था को स्थायी, सुरक्षित एवं विश्वसनीय बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए तकनीकी सुधार, नियमित रखरखाव और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि ऊर्जा राजधानी कहलाने वाले कोरबा में यदि कोयला उत्पादन करने वाले कर्मचारियों की कॉलोनियां ही 24 घंटे तक अंधेरे में डूबी रहें, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को दर्शाता है। ऐसे में एसईसीएल प्रबंधन से जल्द ठोस समाधान और बेहतर विद्युत व्यवस्था की उम्मीद की जा रही है।




