Chhattisgarh

सरकारी योजना का शौचालय बेचने का आरोप, बहुओं ने खोली घर की ‘चुप्पी’

0.कोरबा में ससुराल पक्ष पर मारपीट, धमकी और प्रताड़ना का केस दर्ज

कोरबा, 24 मई । छत्तीसगढ़ के औद्योगिक नगर कोरबा से घरेलू प्रताड़ना और महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां शासन की योजना के तहत बहू के नाम से निर्मित शौचालय को ही कथित तौर पर ससुर और जेठ द्वारा बेच दिए जाने का आरोप लगा है। विरोध करने पर बहुओं को न केवल शौचालय उपयोग करने से रोका गया, बल्कि गाली-गलौच, मारपीट और जान से मारने की धमकियां देने की शिकायत भी पुलिस तक पहुंची है। मामले में पुलिस ने परिवार के चार सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, रामपुर क्षेत्र निवासी प्रार्थिया ने सरकारी योजना के अंतर्गत अपने नाम से शौचालय का निर्माण कराया था। आरोप है कि कुछ समय बाद उसके ससुर और जेठ ने उक्त शौचालय को किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया। इसके बाद पीड़ित परिवार के सामने दैनिक जरूरतों को लेकर समस्या खड़ी हो गई।

शिकायत में कहा गया है कि जब पीड़ित परिवार घर में मौजूद दूसरे शौचालय का उपयोग करता था, तब भी ससुराल पक्ष द्वारा आपत्ति जताई जाती थी। महिलाओं को यह कहकर अपमानित किया जाता था कि “तुम लोग अलग रहते हो, हमारा शौचालय क्यों इस्तेमाल करते हो।”

पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब उसने अलग से शौचालय निर्माण के लिए जमीन मांगी, तब ससुर ने साफ इनकार कर दिया। कथित तौर पर कहा गया कि “हम लोग शौचालय नहीं बनने देंगे, जो करना है कर लो।”

मामले में परिवार की दूसरी बहू नेहा देवी ने भी प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि घर के नल से पानी भरने जैसी सामान्य बातों को लेकर विवाद किया जाता था और आए दिन गाली-गलौच की जाती थी।

लगातार विवाद और कथित प्रताड़ना से परेशान होकर दोनों महिलाएं सिविल लाइन थाना रामपुर पहुंचीं और लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी ससुर सुबोध सिंह, जेठ रंजीत सिंह, सास गिरजा देवी और जेठानी मीरा देवी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 3(5) और 351(3) के तहत अपराध दर्ज किया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पक्षों के बयान लिए जाएंगे। प्रारंभिक जांच के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में महिलाओं के अधिकार, सरकारी योजनाओं के उपयोग और घरेलू स्तर पर होने वाली प्रताड़ना जैसे गंभीर सवाल भी खड़े कर रहा है।

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