जल जीवन मिशन की पोल: दो साल बाद भी अधूरी पड़ी पानी टंकी, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ठाड़पखना के ग्रामीण

गीतिका वैष्णव,कोरबा,11 मई 2026। केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना पाली विकासखंड के ग्राम पंचायत सगुना के आश्रित ग्राम ठाड़पखना में दम तोड़ती नजर आ रही है। गांव में दो वर्ष पहले शुरू किया गया पानी टंकी निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है। मौके पर सिर्फ लोहे का ढांचा खड़ा है, जबकि न तो पानी टंकी स्थापित की गई और न ही बोरिंग का कार्य कराया गया। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार ठाड़पखना गांव में जल जीवन मिशन के तहत क्रेडा विभाग द्वारा पानी टंकी निर्माण कार्य शुरू कराया गया था। योजना का उद्देश्य गांव के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी योजना अधूरी पड़ी हुई है। गांव में बनाए गए ढांचे को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि कार्य लंबे समय से बंद पड़ा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद कुछ दिनों तक काम चला, लेकिन बाद में ठेकेदार और संबंधित विभाग ने सुध नहीं ली। आज स्थिति यह है कि गांव के लोगों को पेयजल के लिए कुएं और एकमात्र बोरवेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ बोरवेल का जलस्तर भी नीचे चला जाता है, जिससे पानी की समस्या और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीण रामसाय कंवर ने बताया कि “दो साल पहले बड़े-बड़े वादे किए गए थे कि हर घर में नल से पानी पहुंचेगा, लेकिन आज तक सिर्फ लोहे का ढांचा खड़ा है। गांव के लोग अब भी पुराने तरीके से पानी भरने को मजबूर हैं।”
वहीं ग्रामीण फूलबाई कंवर ने कहा कि “गर्मी के दिनों में सुबह जल्दी उठकर पानी भरना पड़ता है। कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता है। सरकार की योजना का लाभ हमें अभी तक नहीं मिला है।”
ग्रामीण धनेश्वर यादव ने आरोप लगाया कि जिस जगह पर ढांचा बनाया गया है वह एक ग्रामीण की निजी भूमि है। यदि तेज आंधी या तूफान आया तो यह अधूरा ढांचा गिर सकता है, जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को जल्द इस ओर ध्यान देना चाहिए।
गांव के बुजुर्ग लखन लाल ने बताया कि “अधिकारी कई बार निरीक्षण की बात करते हैं, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं निकला। गांव में पानी की समस्या हर साल बढ़ती जा रही है।”
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि अधूरे पड़े निर्माण कार्य को जल्द पूरा कराया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते योजना पूरी नहीं हुई तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गहरा सकता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर करोड़ों रुपये की योजनाओं के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है। क्या संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्य पूरा कराएगा या फिर ठाड़पखना के ग्रामीण इसी तरह पानी के लिए जूझते रहेंगे।




