कोरबा में रसोई गैस संकट की हकीकत: लंबी वेटिंग, ब्लैक में सिलेंडर, प्रशासन के दावे सवालों के घेरे में

कोरबा। जिले में रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर प्रशासन और गैस एजेंसियों के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि गैस की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को समय पर आपूर्ति दी जा रही है, लेकिन उपभोक्ता बुकिंग के बाद लंबी प्रतीक्षा झेलने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार कई गैस एजेंसियों में करीब 2000 तक उपभोक्ताओं की वेटिंग लिस्ट बन चुकी है, जबकि उपलब्धता सीमित है। नए नियमों के तहत 25 दिन के अंतराल में सिलेंडर देने की बात कही जा रही है, लेकिन बढ़ती मांग और पैनिक बुकिंग के कारण स्थिति और बिगड़ रही है। गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे लोग भी मानते हैं कि संकट बना हुआ है।
इस बीच, गैस संकट को कुछ एजेंसी संचालकों और बिचौलियों ने कमाई का जरिया बना लिया है। आरोप है कि पिछले दरवाजे से घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडर ऊंची कीमत पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अत्यावश्यक स्थिति में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त पैसे देकर सिलेंडर लेना पड़ रहा है।
कोरबा में होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय से जुड़े लोग भी इस स्थिति से प्रभावित हैं। कारोबार को जारी रखने के लिए उन्हें प्रति सिलेंडर 500 से 1000 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है। व्यवसायियों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें यह व्यवस्था स्वीकार करनी पड़ रही है।
हाल ही में प्रशासन की टीम ने बालको नगर के लालघाट क्षेत्र में छापेमारी कर बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर जब्त किए थे। इसके बावजूद शहर में अवैध रूप से सिलेंडर की सप्लाई जारी होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पर्याप्त आपूर्ति का दावा किया जा रहा है, तो बाजार में कमी क्यों बनी हुई है और अवैध सप्लाई पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है।




