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शंकराचार्य केस में हाइकोर्ट द्वारा राहत , अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

प्रयागराज – उत्तराखंड स्थित ज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिगों के कथित यौन शोषण मामले में दर्ज पाक्सो केस में नामजद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती व प्रत्यकचैतन्य मुकुंदानंद गिरि की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुये उनकी अग्रिम जमानत अर्जी पर आदेश सुरक्षित रख लिया है।

शुक्रवार शाम करीब एक घंटे से भी अधिक समय तक दोनो पक्षों की चली सुनवाई के बाद खचाखच भरी अदालत में न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने यह आदेश दिया। यह निर्णय स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के लिये बड़ी राहत माना जा रहा है। सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पक्ष रखा तो शंकराचार्य की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्र और इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता दिलीप गुप्ता ने अदालत के सामने तर्क प्रस्तुत किया। वहीं शिकायकर्ता आशुतोष महाराज की वकील रीना सिंह ने भी दलीलें रखीं। अब मार्च के तीसरे हफ्ते में केस की सुनवाई होगी। कोर्ट की फैसला के बारे में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि झूठ की उम्र ज्यादा देर तक नहीं होती और सच आखिरकार सामने आ ही जाता है , इसलिये इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया है।

उन्होंने कहा कि शंकराचार्य नामक संस्था को बदनाम करने की पूरी कोशिश की गई थी और न्यायालय के आदेश ने उसको ढहा दिया है। उन्होंने कहा कि मुझे पता था झूठ की भी ताकत होती है , लेकिन झूठ की ताकत परेशान करने की होती है , जबकि सत्य की ताकत पराजित करने की होती है। मुझे पता था कि झूठ थोड़ी देर तक अपना काम करेगा और लोग इससे परेशान होंगे। उन्होंने कहा कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिन बातों को जनता के सामने रखा और जिस तरह से झूठा प्रोपेगेंडा फैलाया , आज उसकी कलाई न्यायालय में खुल गई। हम इस बात के साक्षी बने हैं कि एक व्यक्ति झूठा प्रोपेगेंडा लेकर लोगों के सामने आता है , सभी को अपने पीछे घूमने की कोशिश करता है। कानून का किस तरह से दुरुपयोग होता है , यह सब हमने देख लिया। शंकराचार्य ने कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाने को सत्य की जीत बताया है। गौरतलब है कि नाबालिगों के साथ यौन शोषण करने के मामले में दर्ज एफआईआर के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिये हाईकोर्ट पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य की अग्रिम जमानत अर्जी पर आज सुनवाई हुई। शंकराचार्य ने 24 फरवरी को मामले में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी , इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। वहीं विवाद की शुरुआत 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच हुई झड़प से हुई थी। इसके बाद आशुतोष ब्रह्मचारी ने शिकायत दर्ज कराई कि महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान दो नाबालिग बच्चों का यौन शोषण हुआ। कोर्ट ने बच्चों के बयान बंद कमरे में दर्ज करने के बाद एफआईआर का आदेश दिया था। पुलिस सूत्रों का दावा है कि बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट आरोपों की पुष्टि करती है , जबकि शंकराचार्य इसे पूरी तरह निराधार बता रहे हैं।

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