Chhattisgarh

KORBA : पाली शाखा में ब्रांच मैनेजर बना पर्यवेक्षक, दोहरी जिम्मेदारी से वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल

कोरबा, 11 जनवरी। आकांक्षी जिला कोरबा की सबसे चर्चित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की पाली शाखा एक बार फिर सुर्खियों में है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की रेड के करीब पौने दो साल बाद अब यहां पदस्थ प्रभारी ब्रांच मैनेजर द्वारा पर्यवेक्षक और शाखा प्रबंधक दोनों पदों की जिम्मेदारी निभाए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विपरीत प्रकृति के इन दोनों पदों का दायित्व एक ही अधिकारी को सौंपे जाने से बैंकिंग व्यवस्था की वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक का प्रबंधन इस प्रशासनिक अव्यवस्था पर कोई ठोस कार्रवाई करने के बजाय शिकायत का इंतजार करता नजर आ रहा है, जिसे मौन स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बिलासपुर की पाली शाखा में 22 अप्रैल 2024 को एसीबी ने भ्रष्टाचार के एक मामले में छापा मारते हुए किसान से धान भुगतान के एवज में रिश्वत लेते तत्कालीन शाखा प्रबंधक अमित दुबे और कैशियर आशुतोष तिवारी को 5 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इस घटना के बाद बैंक के पर्यवेक्षक रमन कश्यप को पाली शाखा का प्रभारी ब्रांच मैनेजर बनाया गया। नियमानुसार इसके बाद शाखा में एक स्वतंत्र पर्यवेक्षक की पदस्थापना की जानी थी, लेकिन बैंक मुख्यालय द्वारा ऐसा नहीं किया गया और ब्रांच मैनेजर को ही पर्यवेक्षक की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी गई।

बैंकिंग नियमों के अनुसार पर्यवेक्षक और ब्रांच मैनेजर के कार्यदायित्व एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होते हैं। पर्यवेक्षक द्वारा ऋण प्रकरणों का परीक्षण और सत्यापन किया जाता है, जबकि उनके द्वारा प्रेषित प्रकरणों को स्वीकृत करने की जिम्मेदारी ब्रांच मैनेजर की होती है। दोनों पदों के लिए अलग-अलग यूजर आईडी निर्धारित रहती है ताकि जांच और स्वीकृति की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। इसके बावजूद एक ही अधिकारी को दोनों भूमिकाएं सौंपे जाने से समस्त बैंकिंग और वित्तीय कार्यों की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

यह भी सामने आया है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बिलासपुर की किसी अन्य शाखा में इस तरह की व्यवस्था लागू नहीं है। ऐसे में पाली शाखा को विशेष छूट दिए जाने की आशंकाएं और गहराती जा रही हैं। जानकारों का कहना है कि जिस शाखा में पहले ही भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में एसीबी की रेड हो चुकी है, वहां अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता थी, लेकिन इसके उलट उसी शाखा के पर्यवेक्षक को ब्रांच मैनेजर का प्रभार देकर पूरे सिस्टम को एक व्यक्ति पर केंद्रित कर दिया गया।

ग्रामीण किसानों की ओर से भी शाखा में भेदभावपूर्ण भुगतान और अव्यवस्थाओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आरोप है कि भुगतान में चेहरा देखकर राशि दी जा रही है, जिसकी पुष्टि जांच के दौरान भी हो चुकी है। इसके बावजूद बैंक प्रबंधन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाना कई सवाल खड़े करता है।

इस मामले में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बिलासपुर के सीईओ प्रभात मिश्रा का कहना है कि बैंक में अमले की कमी है और विशेष परिस्थितियों में व्यवस्थान्तर्गत एक अधिकारी को दोहरा दायित्व दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ब्रांच मैनेजर के विरुद्ध कोई शिकायत प्राप्त होती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी तथा कर्मचारियों की भर्ती जल्द की जाएगी। हालांकि, शिकायत के इंतजार में बैठा बैंक प्रबंधन और पाली शाखा में लागू यह दोहरी व्यवस्था अब भी जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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