Chhattisgarh

कोरबा के पोड़ी उपरोड़ा में शिक्षा व्यवस्था बदहाल, 158 सहायक शिक्षक पद रिक्त, एकल शिक्षकों के भरोसे स्कूल

कोरबा । कोरबा जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है। शिक्षकों से पढ़ाई के अलावा अन्य कार्य लिए जाने और पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई-लिखाई प्रभावित हो रही है। जिले के सबसे पिछड़े विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा में हालात सबसे गंभीर बने हुए हैं।

जानकारी के अनुसार पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड में सहायक शिक्षक के कुल 158 पद रिक्त हैं। इनमें से अधिकांश स्कूल घने जंगल और दुर्गम इलाकों में स्थित हैं, जहां शिक्षक पदस्थापना से बचते नजर आ रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि कई स्कूल आज भी एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।

शिक्षकों की कमी केवल प्राथमिक शालाओं तक सीमित नहीं है। विकासखंड की शासकीय माध्यमिक शालाओं में भी शिक्षक (एलबी) के 64 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इससे माध्यमिक स्तर की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है और बच्चों का शैक्षणिक भविष्य खतरे में नजर आ रहा है।

शिक्षकों की कमी का यह मामला सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत सामने आया है। आरटीआई के जवाब में जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड की 405 शासकीय प्राथमिक शालाओं में सहायक शिक्षक के 94 पद रिक्त हैं, जबकि 137 शासकीय माध्यमिक शालाओं में शिक्षक (एलबी) के 64 पद अब तक नहीं भरे जा सके हैं।

एतमानगर, मुड़ढक्की, औराभांठा, बरतराई, आमाखोखरा, रामपुर, अमलडीहा, मुकुवा, आश्रम मेरई, खिरटी, नवापारा, सलिहापहरी, अरसिंया, गुडरुमुड़ा, हथमार, सिरकीकला, पुटुवा, बेतलो, कौआताल, दमहामुड़ा, पीपरकुंडा, जटगा, झिनपुरी, तुलबुल, केंदई, कुम्हारीसानी, लखनपुर, लमना, चोटिया, कटमोरगा, पिपरिया, गिद्धमुड़ी, पुटीपखना, बनपीपर, पोड़ीखुर्द, सैला, तनेरा सहित दर्जनों प्राथमिक शालाओं में शिक्षक पद रिक्त हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं की गई, तो ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के बच्चों की शिक्षा पर इसका गहरा असर पड़ेगा। वर्तमान स्थिति शिक्षा विभाग और शासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

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