छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तीन अधिवक्ताओं को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 16 और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नामांकन) नियम, 2018 के अंतर्गत अशोक वर्मा, मनोज परांजपे और सुनील ओटवानी को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया है। यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा जयसिंह बनाम भारत के सर्वोच्च न्यायालय वाद में पारित आदेश के आलोक में लिया गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए हाईकोर्ट अधिवक्ता अमित सोनी ने कहा, “वरिष्ठ अधिवक्ता की मान्यता केवल प्रतीकात्मक नहीं होती, बल्कि यह उत्कृष्ट वकालत, दीर्घ अनुभव और नैतिक मानदंडों की सार्वजनिक स्वीकृति होती है। इससे अधिवक्ताओं को अदालत में विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं और न्यायिक प्रक्रिया की गुणवत्ता भी सुदृढ़ होती है।” यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू मानी गई है। उच्च न्यायालय की फुल कोर्ट द्वारा विधिक मापदंडों, पेशेवर साख और विधि क्षेत्र में योगदान के आधार पर इन नामों को अनुमोदन प्रदान किया गया।
इस निर्णय के साथ ही, उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं की नियुक्ति के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह निर्णय न केवल छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल प्रस्तुत करता है।