देव दिवाली पर महाकाल की नगरी रोशन: शिप्रा के रामघाट पर सीएम की पत्नी समेत कई श्रद्धालुओं ने किया दीपदान

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उज्जैन2 घंटे पहले
कार्तिक पूर्णिमा पर सोमवार को उज्जैन की शिप्रा नदी के राम घाट पर अद्भुत नजारा देखने को मिला। यहां कार्तिक पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में पहुंचे। हजारों श्रद्धालुओं ने दीपदान किया। शाम को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह भी उज्जैन पहुंची। उन्होंने भी यहां दीपदान कर भोग लगाया। इस दौरान रामघाट का नजारा खूबसूरत और आकर्षक दिखाई दे रहा था।
धार्मिक नगरी उज्जैन में सोमवार सुबह से वैकुंठ चतुर्दशी मनाई गई। वहीं, शाम को कार्तिक पूर्णिमा शुरू होने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिप्रा किनारे पहुंचे। मंगलवार को चंद्रग्रहण होने से श्रद्धालुओं ने सोमवार को दीपदान किया। शाम ढलते ही बड़ी संख्या में लोग नदी के तट पहुंचकर दीपदान किया। इससे शिप्रा का आंचल रात में हजारों दीपों की रोशनी से जगमगाता दिखाई दिया।

रात में शिप्रा नदी के तट पर हजारों लोगों ने दीपदान किया। दीपदान के बाद नदी के रामघाट पर ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिला।
मान्यता- यम की यातना से मुक्ति पाने के लिए दीपदान
ज्योतिर्विद पं. आनंदशंकर व्यास ने बताया कि कार्तिक मास में आने वाली पूर्णिमा का महत्व अधिक होता है। सोमवार-मंगलवार को पड़ रही पूर्णिमा तिथि को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन पवित्र तीर्थ नदियों में स्नान व दान का बड़ा महत्व है। मंगलवार को साल का आखिरी चंद्रग्रहण भी लगने जा रहा है। देव उठनी ग्यारस से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक देव दिवाली मनाने की परंपरा है। पूर्णिमा को शाम को नदियों पर दीप दान किया जाता है। उज्जैन के शिप्रा नदी के रामघाट, बनारस, हरिद्वार सहित कई बड़ी नदियों पर दीपदान होता है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह भी कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान करने उज्जैन पहुंचीं।
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण होता है। इस दिन देवी-देवताओं को खुश करने के लिए लोग नदियों में स्नान दीपदान और दान पुण्य करते हैं। मान्यता है कि दीपदान करने से पितरों के लिए बैकुंठ के द्वार खुलते हैं। पं. राकेश जोशी पुजारी के अनुसार पूर्णिमा को विष्णु और शिव का पूजन का भी विधान है। यही वजह है कि कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालु क्षिप्रा में स्नान के लिए पहुंचते हैं।
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