महाराजा तुकोजीराव क्लॉथ मार्केट: क्लॉथ मार्केट में मुहूर्त के सौदों की परंपरा के 100 साल पूरे, 1922 में शुरुआत हुई थी

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इंदौर17 मिनट पहले
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महाराजा तुकोजीराव क्लॉथ मार्केट मर्चेंट एसोसिएशन द्वारा शुक्रवार को तीन दिन के दीपावली अवकाश के बाद मुहूर्त के सौदे किए गए। व्यापारियों ने इस अवसर पर अपने बहीखातों की पूजा कर, उन पर कुमकुम चावल चढ़ाकर स्वस्तिक बनाया। अब इनमें नए साल के खाते 1 अप्रैल से लिखे जाएंगे। दिनभर चौघड़िये के अनुसार व्यापारियों ने माल खरीदा बेचा।
- 1200 दुकानें चलती हैं क्लॉथ मार्केट में
- 1000 से अधिक व्यापारी हर दिन करते
- हैं व्यापार, 850 सदस्य एसोसिएशन में
सेठ हुकमचंद के सभापति बनने से शुरुआत
एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी अरुण बाकलीवाल ने बताया कि दीपावली की 3 दिन के अवकाश के बाद मुहूर्त का कामकाज शुरू हुआ। मुहूर्त की परंपरा 1922 के बाद से सेठ हुकमचंद को प्रथम सभापति बनाने के बाद से चली आ रही है। जब मिलें चालू थीं, तब कपड़े की गठानों के सौदे होते थे और इंदौर से देश-विदेश में कपड़ा जाता था। पहले दिवाली के दूसरे दिन से ही बहीखाते बदले जाते थे।
समय बदला, परंपरा अब भी कायम है
अब लेखाबंदी 1 अप्रैल से होने के कारण पूजन करके बहीखातों को रख दिया जाता है। इस मौके पर नंदकिशोर नीमा, अरुण बाकलीवाल, कैलाश मित्तल आदि मौजूद थे।
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