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लॉन्ग लिव द क्वीन नहीं हर-हर महादेव के उद्घोष से बनारस में हुआ था ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ का स्वागत

ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलिजाबेथ की हाथी पर सवारी निकली तो बनारस के लोगों ने हर हर महादेव के उद्घोष से उनका स्वागत किया। काशी प्रवास के दौरान महारानी नदेसर पैलेस की मेहमान बनी थीं।

ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलिजाबेथ का 96 साल की उम्र में निधन हो गया। क्वीन एलिजाबेथ का भारत से भी गहरा नाता था। हम आपको क्वीन एलिजाबेथ की भारत यात्रा से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी बताने जा रहे हैं। ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 61 साल पहले काशी की यात्रा की थी। 27 फरवरी 1961 को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ काशी आईं ब्रिटेन की महारानी के मेजबान बने थे तत्कालीन काशी नरेश महाराज विभूति नारायण सिंह। रामनगर की सड़कों और छतों के साथ काशी के घाटों पर उमड़े हुजूम ने उनका ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष से स्वागत किया था।

1947 में देश को आजादी मिलने के 14 साल बाद महारानी एलिजाबेथ भारत के दौरे पर आई थीं। दिल्ली में भव्य स्वागत के बाद राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड का उन्होंने अवलोकन किया था। भारत यात्रा के दौरान जयपुर, चेन्नई, अहमदाबाद, साबरमती आश्रम, हैदराबाद, मुम्बई और बंगलुरू ने भी उनकी मेजबानी की। इसमें सबसे खास यात्रा काशी की रही। इस यात्रा में महारानी की सवारी बनी महाराज बनारस की बेंटले कार आज भी रामनगर किले में महफूज है। रामनगर किले में पूरे राजसी ठाटबाट से महाराज विभूति नारायण सिंह ने एलिजाबेथ द्वितीय का स्वागत किया और हाथी पर चांदी के हौदे में उन्हें नगर भ्रमण भी कराया। रामनगर किले के बाहर महारानी की एक झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी तो छतों पर महिलाएं और बच्चे भी उन्हें देखने के लिए जमा थे। 

काशी नरेश ने ब्रिटेन की साम्राज्ञी को गंगा विहार भी कराया था। तब एक सजे-धजे बजड़े में महारानी ने काशी के घाटों का दर्शन किया था। बजड़े पर ‘गॉड सेव द क्वीन’ के बैनर भी लगाए गए थे। मणिकर्णिका घाट पर जलती चिताएं उस वक्त महारानी के कौतूहल का कारण बनी थीं। ‘बर्निंग घाट्स ऑफ काशी’ शीर्षक से यह तस्वीरें भी तब लंदन के अखबारों में छपी थीं।

मोदी ने भेंट की थीं यात्रा की यादगारें

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवम्बर 2015 में अपने इंग्लैंड दौरे में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय से भेंट की थी। मोदी महारानी के लिए 1961 की उनकी भारत यात्रा की यादगारें भी ले गए थे। तोहफे में बनारसी शॉल के साथ साबरमती आश्रम, दिल्ली के राजपथ और काशी में हाथी पर सवारी के दौरान की महारानी की तस्वीरें थीं। बकिंघम पैलेस में रात्रिभोज पर आमंत्रित प्रधानमंत्री ने महारानी को यह भेंट दी थी।

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