शहीद की अंत्येष्टि में छलका पिता का दर्द: बोले- छोटे बेटे को भी सेना में भेज दो या सरकारी नौकरी लगवा दो

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शिवपुरी3 घंटे पहले
शिवपुरी के सपूत अमर शर्मा का अंतिम संस्कार शुक्रवार रात को कर दिया गया। वे सियाचिन में भारत-चीन सीमा पर तैनात थे और कड़ाके की ठंड में हार्ट अटैक की वजह से उनका निधन हो गया था। अमर को अंतिम विदाई के समय उनके पिता का दर्द छलक आया। उन्होंने रोते हुए मौके पर मौजूद अफसरों से मदद की गुहार लगाई।
अमर के पिता सियाराम शर्मा ने रोते हुए कहा कि अमर ही बुढ़ापे का सहारा था। आप मेरे दूसरे बेटे को सेना में लगवा दो, ऐसा नहीं हो सकता तो किसी भी सरकारी नौकरी में लगवा दो। ताकि परिवार का लालन-पालन ठीक से हो सके। यह देख मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गई। लोगों ने ‘खरई भाट’ गांव के नाम में शहीद का नाम अमर जोड़ने की मांग की। लोगों ने गांव का नाम ‘अमर खरई’ करने को कहा।
छोटे बेटे को भी सेना में भिजवा दो
शहीद अमर की अंत्येष्टि में कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह और एसपी राजेश सिंह चंदेल भी पहुंचे। यहां अमर के पिता सियाराम शर्मा ने उनसे मदद दिलाने की गुहार लगाई। सियाराम ने कहा कि हमारे पास पांच बीघा जमीन है, जिसमें दो भाई हैं, जैसे-तैसे अमर को बुढ़ापे की लाठी बनने के लिए तैयार किया था। बुढ़ापे की दहलीज पर अमर हमें छोड़कर चला गया। अमर के जाने के बाद उसकी पत्नी, दो छोटे भाई और मां पीछे छूट गए हैं। सभी का पालन पोषण अमर ही कर रहा था। खेती से सिर्फ सालभर के खाने के लिए अनाज ही हो पाता है। ऐसी स्थिति में अमर के सबसे छोटे भाई को आर्मी में भेज दो और अगर ऐसा नहीं होता है तो उसे कोई भी सरकारी नौकरी दिलाई जाए। जिससे परिवार की देखरेख कर सके। खरई भाट गांव के नाम के आगे अमर नाम जोड़कर गांव का नाम अमर खरई किया जाए, जिससे आने वाले समय में अमर की शहादत को लोग याद रख सकें।

बेटे के अंतिम संस्कार के समय अपनी पीढ़ा बताते अमर के पिता सियाराम शर्मा।
हर किसी की आंखें थीं नम
इससे पहले शहीद अमर शर्मा की पार्थिव देह शुक्रवार रात सेना के ट्रक में शिवपुरी पहुंची। शिवपुरी के लाल को तिरंगे में लिपटा देख हर आंख नम थी। उसे श्रद्धांजलि देने के लिए हजारों लोग शहर की सड़कों पर दिखाई दिए। यहां से पार्थिव देह गृह ग्राम खरई भाट ले जाई गई।
अंतिम विदाई देने गांव पहुंचे 50 हजार लोग
गांव में करीब 50 हजार लोग अमर को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचे। अमर के छोटे भाई ने उन्हें मुखाग्नि दी। रात करीब 11:45 बजे अंतिम संस्कार के समय लोगों ने वंदे मातरम् और भारत माता की जय के नारे लगाए। आंखों में आंसू होने के बावजूद हर शहरवासी अमर के बलिदान पर गर्व महसूस कर रहा था। हर किसी की ज़ुबान पर सिर्फ यही शब्द था कि हमारा लाल अपने नाम की तरह हमेशा के लिए अमर हो गया।

गृह ग्राम खरई भाट में शुक्रवार रात करीब 11:45 बजे अमर शर्मा का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान गांव में करीब 50 हजार लोग अंतिम विदाई देने पहुंचे।
जितनी देर हुई, उतनी भीड़ बढ़ती गई
अमर की पार्थिव देह ग्वालियर से सड़क मार्ग से शिवपुरी पहुंची। यहां SAF की 18वीं बटालियन पर सैकड़ों युवा अमर काे श्रद्धांजलि देने पहंचे। उन्होंने करीब तीन घंटे तक वाहन का इंतजार किया। जितनी देरी हो रही थी उतनी ही भीड़ बढ़ती गई। रात करीब 8 बजे अमर की पार्थिव देह यहां पहुंची। यहां से अमर की अंतिम यात्रा शुरू हुई, जिसमें शहर से लेकर गांव तक के हजारों लोग बाइक, कार सहित पैदल शामिल हुए। अंतिम यात्रा में वंदे मातरम्, भारत माता की जय, और जब तक सूरज चांद रहेगा अमर तेरा नाम रहेगा के नारे गूंज रहे थे।
सेना के ट्रक में पार्थिव देह के साथ अमर के पिता व भाई सवार थे, जिनका रो-रोकर बुरा हाल था। अंतिम यात्रा के दौरान सड़क किनारे खड़े लोगों में से कोई अमर की पार्थिव देह को सैल्यूट कर रहा था, तो काेई हाथ जोड़ कर उसकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना मांग रहा था। इस दौरान अंतिम यात्रा में चल रहे डीजे पर देशभक्ति के गीत बज रहे थे।

गांव में अमर शर्मा के अंतिम संस्कार के दौरान जवानों ने उसे गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
शहीद अमर शर्मा अंतिम यात्रा देर रात 11 बजे अपने ग्रह ग्राम पहुंची। जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान आर्मी के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था तो वहीं अमर के बचपन के साथी भी अपने आप को संभाल नहीं पा रहे थे। शहीद अमर शर्मा की पत्नी बेसुध हो चुकी थी। परिजन जैसे-तैसे अमर की पत्नी कीर्ति को उनकी पार्थिव देह के पास लेकर पहुंचे। जिसके बाद अमर की पत्नी की पुकार ने सबकी आंखों में आंसू ला दिए। आखिरकार शहीद अमर को मुखाग्नि अमर के भाई ने दी।

राजकीय सम्मान के साथ अमर का अंतिम संस्कार हुआ। इस दौरान आर्मी के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
व्यवस्थाओं का रहा टोटा, धक्का-मुक्की के बीच अंतिम संस्कार
शहीद अमर शर्मा की अंतिम विदाई के दौरान व्यवस्थाओं करने को लेकर प्रशासन काफी हद तक असफल रहा। जिस जगह अमर को मुखाग्नि दी गई वहां भारी भीड़ मौजूद रही। प्रशासन ने इससे पहले कोई भी सुरक्षा और व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए, जिसके चलते परिजनों सहित अन्य लोगों को अमर के अंतिम दर्शन करने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
कई लोग अमर के अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाए। जिस जगह शहीद अमर का अंतिम संस्कार किया जा रहा था। वहां ना ही बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई और ना ही पर्याप्त बिजली की। ऐसी स्थिति में हजारों लोगों को धक्का-मुक्की और परेशानियों का सामना करना पड़ा। अमर को अंतिम विदाई देने आसपास के कई गांव के लोग पहुंचे। पढ़े पूरी खबर

सियाचिन में थे तैनात अमर शर्मा का देहावसान गुरुवार को हार्टअटैक की वजह से हुआ था। वे सियाचिन में मानइस 30 डिग्री तापमान में देश की सुरक्षा में तैनात थे। भारतीय पूर्व सैनिक संगठन इंडियन वेटरन ऑर्गेनाइजेशन शिवपुरी के जिला अध्यक्ष रिटायर्ड कैप्टन सीपी शर्मा ने बताया कि शिवपुरी के शहीद जवान की अंत्येष्टि के लिए सरकारी 3 बीघा जमीन चयनित की गई है। जहां शहीद का अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसी जगह शहीद पार्क भी बनाया जाएगा।

2 साल पहले ही हुई थी शादी
अमर शर्मा का जन्म 1996 में खरई भाट गांव में हुआ था। उनके 2 भाई हैं, सतेंद्र शर्मा (24) और अरुण शर्मा (22)। अमर के पिता पेशे से किसान हैं। अमर ने 2015 में छतरपुर में सेना की भर्ती परीक्षा दी थी। जबलपुर में ट्रेनिंग के बाद गुवाहाटी में पहली पोस्टिंग मिली थी। 2 साल बाद अमर की पोस्टिंग लद्दाख के सियाचिन में हुई थी। 2 साल पहले 2020 में अमर की शादी हुई थी।
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