2573.50 करोड़ रुपये का मिला लक्ष्य, चार माह में 224.92 करोड़ का राजस्व जुटाने में सफल खनिज विभाग

कोरबा। प्रदेश के सबसे अधिक राजस्व देने वाले जिलों में शामिल कोरबा का खनिज विभाग एक बार फिर बड़े राजस्व लक्ष्य को हासिल करने की चुनौती के साथ काम कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शासन ने जिले के खनिज विभाग को 2573.50 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य सौंपा है। लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में विभाग ने शुरुआती चार महीनों में 224.92 करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र कर लिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वर्षभर खनिज उत्पादन, रॉयल्टी वसूली और अवैध उत्खनन पर नियंत्रण की रणनीति के साथ लक्ष्य हासिल करने का प्रयास किया जाएगा।
कोरबा जिले की पहचान देश के सबसे बड़े कोयला उत्पादक क्षेत्रों में होती है। जिले में संचालित विशाल कोयला परियोजनाओं के कारण यहां से हर वर्ष प्रदेश सरकार को हजारों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। यही वजह है कि राज्य सरकार हर वर्ष जिले के लिए बड़ा राजस्व लक्ष्य निर्धारित करती है।
हालांकि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग को 2545 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन विभाग निर्धारित लक्ष्य से पीछे रह गया था। विभाग करीब 90 प्रतिशत राजस्व ही जुटा सका और शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल नहीं हो पाया। इसके बावजूद इस वर्ष शासन ने जिले की उत्पादन क्षमता और खनिज संसाधनों को देखते हुए लक्ष्य बढ़ाकर 2573.50 करोड़ रुपये कर दिया है।
जिला खनिज विभाग के सहायक उप संचालक प्रमोद कुमार नायक ने बताया कि जिले के कुल खनिज राजस्व में लगभग 99 प्रतिशत हिस्सेदारी कोयला खनन की है। जिले की प्रमुख कोयला परियोजनाओं में एसईसीएल की गेवरा, दीपका, कुसमुंडा, कोरबा एरिया, सराईपाली, बुड़बुड़ और बांकीमोंगरा खदानें शामिल हैं। इन परियोजनाओं से होने वाले उत्पादन और रॉयल्टी के माध्यम से विभाग को सबसे अधिक राजस्व प्राप्त होता है। इसके अलावा रेत, गिट्टी, मुरुम और मिट्टी जैसे गौण खनिजों के खनन एवं परिवहन से भी विभाग को राजस्व मिलता है, हालांकि इसकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष के पहले चार महीनों में 224 करोड़ 92 लाख रुपये का राजस्व संग्रह किया जा चुका है। आने वाले महीनों में कोयला उत्पादन और परिवहन में तेजी आने के साथ राजस्व संग्रह की गति भी बढ़ने की उम्मीद है। विभाग नियमित रूप से खनन गतिविधियों की निगरानी कर रहा है और अवैध उत्खनन तथा अवैध परिवहन के मामलों पर भी सख्त कार्रवाई की जा रही है, ताकि राजस्व की किसी प्रकार की क्षति न हो।
खनिज विभाग का मानना है कि यदि वर्षभर कोयला उत्पादन और परिवहन सामान्य रूप से चलता रहा तथा सभी खनन कंपनियों से समय पर रॉयल्टी प्राप्त होती रही, तो इस वर्ष निर्धारित लक्ष्य हासिल करना संभव होगा। प्रदेश के खनिज राजस्व में कोरबा की सबसे बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण शासन की भी इस जिले के प्रदर्शन पर विशेष नजर बनी हुई है। विभाग को उम्मीद है कि बेहतर समन्वय, प्रभावी निगरानी और नियमित राजस्व वसूली के बल पर इस वर्ष लक्ष्य प्राप्त करने में सफलता मिलेगी।




