12 लाख की निविदा में ‘ऑफलाइन खेल’! अपने चहेते को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को दरकिनार करने का आरोप

कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी (सीएसपीजीसीएल) के डीएसपीएम संयंत्र में अधीक्षण अभियंता (सिविल) के कार्यालय से जारी एक निविदा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि अपने चहेते ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लगभग 12 लाख रुपये से अधिक की निविदा को ऑनलाइन करने के बजाय मैन्युअल (ऑफलाइन) तरीके से जारी किया गया, जबकि सरकारी नियम इसके विपरीत हैं। जानकारी के अनुसार अधीक्षण अभियंता (सिविल) कार्यालय को दो एसयूवी वाहनों की आवश्यकता बताई गई है। इनमें से एक वाहन पावर प्लांट के सिविल विभाग के उपयोग के लिए तथा दूसरा कार्यपालन अभियंता कॉलोनी के उपयोग के लिए प्रस्तावित है।
पहला टेंडर क्रमांक अधि. अभियंता/सिविल/डीएसपीएम-14/2026 दिनांक 10 फरवरी 2026 को जारी किया गया, जिसकी अनुमानित राशि 12 लाख 6 हजार 374 रुपये बताई गई है। वहीं दूसरा टेंडर क्रमांक अधीक्षण अभियंता/सिविल/डीएसपीएम-22/2026 दिनांक 18 फरवरी 2026 को जारी किया गया है, जिसकी निविदा राशि भी लगभग 12 लाख 6 हजार 374 रुपये है।
नियम क्या कहते हैं?
शासकीय निविदा प्रक्रिया के अनुसार 5 लाख रुपये से अधिक की किसी भी निविदा को ऑनलाइन माध्यम से जारी करना अनिवार्य होता है। साथ ही इतनी राशि की निविदा के लिए तीन समाचार पत्रों में निविदा सूचना प्रकाशित करना भी आवश्यक है, जिसमें दो स्थानीय और एक राष्ट्रीय अखबार शामिल होना चाहिए।
लेकिन आरोप है कि अधीक्षण अभियंता कार्यालय द्वारा जारी इन दोनों निविदाओं को ऑनलाइन के बजाय मैन्युअल तरीके से जारी किया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
एक ही विभाग में अलग-अलग नियम क्यों?
दिलचस्प बात यह है कि इसी डीएसपीएम में सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर (कॉन्ट्रैक्ट) द्वारा समान कार्य, समान नियम और लगभग समान शर्तों के तहत क्रमांक 16-6/एसपीएम/डीपीएस/एस एंड पी/1/50/टी-2384/26 दिनांक 26 फरवरी 2026 को ऑनलाइन टेंडर जारी किया गया है।
यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि जब एक ही संस्थान में एक अधिकारी ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया अपना रहा है तो अधीक्षण अभियंता (सिविल) कार्यालय ने नियमों को दरकिनार कर
ऑफलाइन टेंडर क्यों जारी किया?
पारदर्शिता पर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया का उद्देश्य पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाना होता है। ऐसे में लाखों रुपये की निविदा को ऑफलाइन जारी करना न केवल नियमों पर सवाल खड़े करता है, बल्कि निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी संदेह पैदा करता है। अब देखना होगा कि इस मामले में उच्च अधिकारी संज्ञान लेते हैं या नहीं, और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।




