12 फरवरी की प्रस्तावित हड़ताल : सीआईएल चेयरमैन ने अपील जारी कर यह कहा

कोरबा, 06 फरवरी। 12 फरवरी को श्रमिक तथा अन्य संगठनों की देशव्यापी हड़ताल बुलाई गई है। कोल सेक्टर के यूनियन ने भी हड़ताल का नोटिस दिया है। इधर, हड़ताल को लेकर कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन बी साईराम ने एक अपील जारी की है। सीआईएल चेयरमैन ने यह अपील की कोयला उद्योग में कार्यरत एमएचएस, एटक, सीटू, इंटक से जुड़े कुछ श्रम संगठनों द्वारा 12 फरवरी 2026 को “4 लेबर कोड के नोटिफिकेशन“ तथा श्रमिकों एवं जनसामान्य की अन्य माँगों के विरोध में एक दिवसीय हड़ताल का नोटिस दिया गया है। औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 एवं उसके अंतर्गत नियमों के प्रावधानों के अनुसार, उक्त हड़ताल नोटिस को मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), नई दिल्ली, कोयला मंत्रालय एवं अन्य प्राधिकरणों को भेजा गया है।
कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) एवं इसकी अनुषंगी कंपनियाँ भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जो देश के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत उत्पादन करती हैं। मानसून से प्रभावित उत्पादन अब पुनः पटरी पर आ रहा है। वित्त वर्ष 2025- 26 के उत्पादन लक्ष्य को पूरा करने और ऊर्जा क्षेत्र की मांग को पूर्ण करने के लिए बिना किसी अवरोध के काम जारी रखना आवश्यक है। इस रिकवरी फेज के दौरान किसी भी प्रकार से काम बंद होने से अनुषंगी कंपनियों की उत्पादन क्षमता में बाधा आ सकती है और देश में कोयले की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) आयातित कोयले पर निर्भरता को कम करके ’आत्मनिर्भर भारत’ पहल में अहम योगदान दे रहा है। कोयला उद्योग में हड़ताल से देश की निरंतर ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ेगा, क्योंकि कोयला वर्तमान में भारत का मुख्य ऊर्जा स्रोत है। सी.आई.एल द्वारा बिजली के अलावा, स्टील, सीमेंट और उर्वरक जैसे ज़रूरी उद्योगों को भी कोयला की आपूर्ति की जाती है, जो देश की आधारभूत संरचना के विकास के लिए बहुत ज़रूरी है।
इसके साथ ही, चूँकि यह मामला श्रम प्रवर्तन प्राधिकरणों के समक्ष सुलह की प्रक्रिया में है, अतः यह एक गैर-कानूनी हड़ताल होगी और इस पर “काम नहीं तो वेतन नहीं“ और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाही लागू होगी। इन परिस्थितियों को देखते हुए, मैं सभी कर्मचारियों एवं हड़ताल कर रहे यूनियनों के समर्थकों से विनम्र आग्रह करता हूँ कि वे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें और 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित एक दिवसीय हड़ताल से कोयला उद्योग को मुक्त रखें। इस हड़ताल से न सिर्फ कर्मचारियों पर बल्कि उद्योग और राष्ट्र के हितों पर असर पड़ेगा।










