हमें ब्राह्मणत्व के पहचान को बनाए रखने की आवश्यकता है- राजेश्री महन्त जी

- वृंदावन हॉल रायपुर में राष्ट्रीय स्तरीय वार्षिक सम्मेलन के साथ स्वर्ण दंपति सम्मान एवं धरोहर सम्मान समारोह आयोजित
महामंडलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास महाराज पीठाधीश्वर श्री दूधाधारी मठ एवं श्री शिवरीनारायण मठ ऑल इंडिया ब्राह्मण फ्रंट रायपुर छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित स्वर्ण दंपति सम्मान एवं धरोहर सम्मान समारोह वृंदावन हॉल रायपुर में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर अतिथियों ने भगवान परशुराम जी के तैल चित्र पर दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ,पुष्पमाला एवं शाल श्रीफल से किया गया।
कार्यक्रम में उन बुजुर्ग दंपतियों का सम्मान किया गया जिन्होंने अपने वैवाहिक जीवन के चालीस वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। राजेश्री महन्त रामसुंदर दास महाराज ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि – ब्राह्मण समाज प्रारंभ से ही संपूर्ण समाज के प्रथम पंक्ति में बैठने वाला समाज है। वर्तमान परिवेश में हम लोगों ने अपने ब्राह्ममणत्व के पहचान को खो दिया है। नई पीढ़ी के लोग अब माथे पर तिलक, सिर में चोंटि, शरीर में जनेऊ धारण नहीं करते। वे अपने पहचान को समाज के सम्मुख लाने में संकोच करते हैं, यह सामाजिक चिंतन का विषय है,समय की आवश्यकता है कि हम उन्हें सुसंस्कृत करें। मुखिया को मुख के समान होना चाहिए जो संपूर्ण अंगों का भली भांति पोषण करता है। ब्राह्मण वे हैं जो अपने अहित करने वालों का भी हित साधन करते हैं, सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया।। के सिद्धांत पर चलते हैं।
निवेदिता मिश्रा ने कहा कि – वकील होने के नाते नवदंपतियों को रोज बिखरते हुए देखती हूं इससे मन में पीड़ा होती है लेकिन यहां यह देखकर प्रसन्नता हो रही है कि लोग 40 वर्षों से किस तरह एक दूसरे के साथ मिलकर रहते हैं और सुखी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष ज्ञानेश शर्मा ने कहा कि -वर्षों पूर्व समाज और परिवार जितना संगठित था वह वर्तमान में तार -तार हो चुका है नई पीढ़ी को अच्छे संस्कार देने की आवश्यकता है। लोगों को सुरेश शुक्ला, सीमा ओझा सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया इस अवसर पर , अजय तिवारी, वीरेंद्र पांडे, सुरेश मिश्रा सहित अन्य अतिथि मंचासीन तथा सामाजिक सदस्य एवं पदाधिकारी काफी संख्या में उपस्थित थे।




