हनुमान मंदिर हटाने पहुंचा नगर निगम का दस्ता: लोगों ने किया विरोध, कहा- नहीं मानेंगे महापौर की बात, पहले व्यापारियों के अतिक्रमण हटाओ

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सतना8 घंटे पहले
सतना शहर के बाजार क्षेत्र में लगभग 150 वर्ष पुराने हनुमान मंदिर को हटाने शुक्रवार को नगर निगम और राजस्व अमला पहुंचा। उन्हें लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। हनुमानजी के भक्तों के जबरदस्त विरोध के कारण कलेक्टर को दखल देना पड़ा और प्रशासन की टीमों को गिना कार्रवाई के लौटना पड़ा।
सतना शहर के हनुमान चौक में वर्ष 1878 में स्थापित हनुमान मंदिर को शिफ्ट करने और वहां बने रसोई कक्ष को तोड़ने की नगर निगम की कोशिशों को शुक्रवार को एक बार फिर विरोध झेलना पड़ा है। शुक्रवार को नगर निगम के अतिक्रमण दस्ता प्रभारी रमाकांत शुक्ला यहां कार्रवाई करने पहुंचे तो आस्थावानों का गुस्सा भड़क गया। दस्ता प्रभारी ने सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्यों का हवाला दिया।
महापौर की बात भी नहीं मानी जाएगी: श्रद्धालु
उन्होंने मंदिर को शिफ्ट कर उसके ऊपरी तल पर पुजारी का निवास और रसोई बनाने की सलाह दी, तो लोगों की नाराजगी और बढ़ गई। उन्होंने कहा कि यह मंदिर 1878 से यहीं है, रसोई कक्ष भी अतिक्रमण कर बेजा तौर पर नही बनाया है, बल्कि बाकायदा उसका आवंटन है। इसके दस्तावेज भी हैं। बात बढ़ी तो नजूल के आरआई वीरेश सिंह भी पहुंचे। उन्होंने भी राजस्व रिकार्ड देखे। बावजूद इसके उन्होंने भी निगम के अमले के सुर में सुर मिलाना शुरू कर दिया। निगम के अमले ने महापौर का नाम लेना शुरू किया, तो वहां विरोध जता रहे लोगों ने दो टूक कहा कि वे महापौर की बात नहीं मानेंगे। भगवान के ऊपर किसी का निवास नहीं बनाया जाता। इस मामले में वे कलेक्टर के पास जाएंगे।

लोगों ने कहा कि भगवान के ऊपर किसी का निवास नहीं बनाया जाता।
कलेक्टर ने कहा- आम सहमति के बाद होगी कार्रवाई
इस मसले को लेकर सोशल मीडिया में भी विरोध शुरू हो गया। जिसके बाद कलेक्टर अनुराग वर्मा ने संज्ञान लिया और वहां चल रही प्रक्रिया रुकवा दी। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि बिना आम सहमति के कोई भी काम न किया जाए। कलेक्टर के दखल के बाद नगर निगम और नजूल की टीमें लौट गई और फिलहाल कार्रवाई भी रुक गई। नगर निगम के इस प्रयास का विरोध और तेज हो गया है। इस मामले में विरोध की चिंगारियां महापौर के दामन पर भी पड़ रही हैं। महापौर ने कुछ व्यापारियों के साथ यहां निरीक्षण किया था। उसी दिन से हनुमान मंदिर और रसोई कक्ष पर संकट के बादल मंडराने लगे थे।
कुछ व्यापारियों के इशारों पर हो रही कार्रवाई
आस्थावानों ने कहा कि हनुमान मंदिर के ही नाम पर बाजार के इस क्षेत्र का नाम हनुमान चौक पड़ा। मंदिर की 1878 में स्थापना के बाद यहां तमाम निर्माण हुए। तमाम व्यापारियों ने अपनी-अपनी हद खुद बढ़ा ली और नाली-सड़क के ऊपर भी अवैध निर्माण कर डाले। नगर निगम को व्यापारियों के वे अतिक्रमण नजर नहीं आ रहे हैं, लेकिन कुछ व्यापारियों के इशारे पर हनुमान मंदिर आंखों में खटक रहा है। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर हनुमान मंदिर को क्षति पहुंचाने का इरादा नहीं बदला, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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