प्रताड़ना से आत्महत्या का मामला: महिला दोषी करार, पांच साल की सजा

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कोरबा। हत्या और आत्महत्या से जुड़े एक गंभीर मामले में कोरबा की सत्र अदालत ने एक महिला को दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस. शर्मा की अदालत ने सुनाया।
मामला 12 मई 2024 का है। लोक अभियोजक राजेंद्र साहू ने बताया कि उरगा थाना क्षेत्र के ग्राम कुकरीचोली निवासी जयराम रजक अपनी पत्नी सुजाता और पुत्री जयशिका के साथ घर के एक कमरे में सो रहा था। जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों को संदेह हुआ। दरवाजा तोड़कर भीतर देखा गया तो जयराम का शव खून से लथपथ पड़ा था, जबकि पत्नी सुजाता और पुत्री जयशिका अचेत अवस्था में थीं।
घटना की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह सामने आया कि पत्नी सुजाता और पुत्री जयशिका की हत्या की गई थी, जबकि जयराम रजक ने आत्महत्या की थी।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि जयराम रजक ने उरगा के सलिहाभांठा ओवरब्रिज के पास रहने वाली संतोषी जगत (42 वर्ष) के मकान का निर्माण कार्य किया था। इस कार्य के एवज में संतोषी पर जयराम के एक लाख 88 हजार 100 रुपये बकाया थे। लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण जयराम मानसिक रूप से परेशान था और लगातार संतोषी से राशि की मांग कर रहा था।
पुलिस ने जयराम के घर से मजदूरी भुगतान से जुड़े दस्तावेज जब्त किए, जिनमें बकाया राशि का उल्लेख था। इसके अलावा संतोषी के यहां काम करने वाले मजदूरों और जयराम के परिजनों के बयान भी दर्ज किए गए, जिनसे बकाया भुगतान की पुष्टि हुई।
सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पुलिस ने संतोषी जगत पति लाल सिंह जगत के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। मामले की सुनवाई कोरबा की सत्र अदालत में चल रही थी।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत से कठोर सजा की मांग करते हुए कहा कि आरोपी की प्रताड़ना के कारण जयराम और उसका पूरा परिवार समाप्त हो गया। वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी एक महिला है और उसके ऊपर बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि जयराम द्वारा आत्महत्या किया जाना और पत्नी व पुत्री की हत्या होना अपराध की गंभीरता को और बढ़ाता है। इसके बाद न्यायालय ने संतोषी जगत को दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।










