श्रीकृष्ण जन्म पर झूमे श्रद्धालु: महाराज ने कहा- भक्ति और भजन की कोई उम्र नहीं, भक्त ध्रुव ने 5 साल की उम्र में ईश्वर को पाया

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टीकमगढ़24 मिनट पहले
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टीकमगढ़ जिले के जनकपुर गांव के देवी जी मंदिर में चल रही श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार रात भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कथा में जैसे ही भगवान का जन्म हुआ तो पूरा पंडाल ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान लोग झूमने-नाचने लगे।
भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप में नन्हें बालक के दर्शन करने के लिए लोग लालायित नजर आए। भगवान के जन्म की खुशी पर महिलाओं ने अपने घरों से लाए गए गुड़ के लड्डूओं से भगवान को भोग लगाया। इस अवसर कथा वाचक महंत सीताराम दास महाराज ने कहा कि जब धरती पर चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई। चारों ओर अत्याचार, अनाचार का साम्राज्य फैल गया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी के 8वें गर्भ के रूप में जन्म लेकर कंस का संहार किया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
भक्त ध्रुव की भक्ति का प्रसंग सुनाया
महंत सीताराम दास ने पहले ध्रुव चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान की प्राप्ति और भजन की कोई उम्र नहीं होती। भक्त ध्रुव महाराज ने मात्र 5 वर्ष की आयु में भगवान को प्राप्त कर लिया। अधम से अधम जीव का भी भगवान का नाम उद्धार कर देता है। भगवान श्रीराम का चरित्र सुने बिना श्री कृष्ण के चरित्र सुनने की पात्रता नहीं होती, इसीलिए भागवत में पहले राम चरित्र और फिर बाद में श्री कृष्ण का चरित्र कहा गया है।

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