रायगढ़ में डिजिटल टोकन में निवेश के नाम पर 11.60 लाख की ठगी, खेत बेचकर लगाई थी रकम, साइबर पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

रायगढ़, 19 अक्टूबर 2026 । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में डिजिटल करेंसी और क्रिप्टो टोकन में निवेश कर कम समय में भारी मुनाफा दिलाने का झांसा देकर 11 लाख 60 हजार रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। आरोपियों ने यूनिटी मेटा टोकन और बीड क्वाइन में निवेश के नाम पर ओडिशा निवासी एक युवक को अपने जाल में फंसाया। अधिक मुनाफे की उम्मीद में युवक ने अपना खेत बेचकर पूरी रकम निवेश कर दी, लेकिन उसे न तो कोई लाभ मिला और न ही निवेश की गई मूल राशि वापस हुई। पीड़ित की शिकायत पर रायगढ़ साइबर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तीनों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित विक्रम परिडा (26 वर्ष), पिता कर्पूर परिडा, मूल निवासी ग्राम डिपाटपुर, जिला गंजाम, ओडिशा का रहने वाला है। वह वर्ष 2024 से रायगढ़ के चक्रधरनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत कसेर पारा में रह रहा है। इसी दौरान उसकी पहचान गजुला मोहन नामक व्यक्ति से हुई, जो चक्रधरनगर क्षेत्र की एक फास्ट फूड दुकान में कुक का काम करता था। दोनों के बीच जान-पहचान बढ़ने के बाद गजुला मोहन ने युवक को डिजिटल टोकन में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया।
आरोप है कि गजुला मोहन ने विक्रम को बताया कि वह स्वयं यूनिटी मेटा टोकन और बीड क्वाइन जैसी डिजिटल निवेश योजनाओं से अच्छा लाभ कमा रहा है। उसने युवक को भरोसा दिलाया कि इन योजनाओं में पैसा लगाने पर कम समय में बड़ी रकम अर्जित की जा सकती है। उसकी बातों पर विश्वास कर विक्रम ने अपनी जमीन बेचने का फैसला कर लिया। खेत बेचने से प्राप्त रकम को उसने 25 जुलाई 2024 से 3 सितंबर 2024 के बीच अलग-अलग किस्तों में निवेश कर दिया। इस दौरान कुल 11 लाख 60 हजार रुपये आरोपियों तक पहुंच गए।
पुलिस जांच में सामने आया कि निवेश की रकम प्राप्त करने के लिए आरोपियों ने बैंक खातों का इस्तेमाल किया था। गजुला मोहन ने चंदन दास के माध्यम से बीड क्वाइन से जुड़े कार्य करने वाले भावेष पटेल के बैंक खाते में रकम जमा कराई थी। निवेश के बाद जब काफी समय तक युवक को कोई मुनाफा नहीं मिला तो उसने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की। आरोपियों ने बार-बार मांग करने के बावजूद पैसे नहीं लौटाए। आखिरकार ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने रायगढ़ साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर साइबर थाना रायगढ़ में अपराध क्रमांक 16/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 3(5) में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। वरिष्ठ SP शशि मोहन सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर पुलिस को आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए।
विवेचना के दौरान पुलिस ने संबंधित बैंक खातों के स्टेटमेंट हासिल किए और उनमें हुए वित्तीय लेन-देन की जांच की। बैंक रिकॉर्ड के आधार पर पीड़ित द्वारा भेजी गई रकम और आरोपियों के खातों के बीच लेन-देन की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और अन्य जानकारियों के आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन भी जांच में शामिल किए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में गजुला मोहन (45 वर्ष), पिता मंगला डोरा, मूल निवासी ग्राम बरमपुर, थाना हिंजली, जिला गंजाम, ओडिशा शामिल है। वह वर्तमान में रायगढ़ के संजय नगर स्थित हिमालया हाइट्स के मकान नंबर सी-110 में रह रहा था। दूसरा आरोपी चंदन दास (33 वर्ष), पिता बटाकृष्ण दास, मूल निवासी ग्राम साबामूला, थाना जगतसिंहपुर, ओडिशा है। वह रायगढ़ स्टेडियम के पास आशीष टोप्पो के मकान में किराए से रह रहा था। तीसरा आरोपी भावेष पटेल (28 वर्ष), पिता जगतराम पटेल, ग्राम कारीछापर, थाना पुसौर, जिला रायगढ़ का निवासी है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी गजुला मोहन के खिलाफ वर्ष 2025 में चक्रधरनगर थाने में धोखाधड़ी का एक अन्य मामला दर्ज किया गया था। यह प्रकरण विवेकानंद राउत, देवेंद्र महापात्रे और शरद जैन से संबंधित शिकायत पर दर्ज हुआ था। पुलिस के अनुसार, उस मामले में न्यायालय से स्टे प्राप्त करने के बाद आरोपी फरार चल रहा था। अब पुलिस पुराने मामले और वर्तमान ठगी के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है।
साइबर पुलिस को जांच के दौरान मुख्य आरोपी गजुला मोहन के संपर्क ओडिशा और मुंबई तक होने की जानकारी भी मिली है। इसके अलावा ठगी की रकम अन्य लोगों तक भेजे जाने की आशंका को लेकर भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि निवेश के नाम पर प्राप्त राशि किन-किन बैंक खातों में पहुंची और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों ने इसी तरह निवेश का लालच देकर अन्य लोगों को भी ठगी का शिकार तो नहीं बनाया है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में अतिरिक्त SP अनिल सोनी और अतिरिक्त SP यातायात पुष्पेंद्र बघेल का मार्गदर्शन रहा। मामले के खुलासे में साइबर TI निरीक्षक विजय चेलक, निरीक्षक विमल राय, सहायक उप निरीक्षक नंद कुमार सारथी, सहायक उप निरीक्षक ज्योत्सना शर्मा, प्रधान आरक्षक दुर्गेश सिंह, रूप राम पटेल और आरक्षक पुष्पेंद्र जाटवर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि डिजिटल करेंसी, क्रिप्टो टोकन या किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता और विश्वसनीयता की अच्छी तरह जांच करें। कम समय में रकम दोगुनी करने या असाधारण मुनाफा दिलाने के वादों पर भरोसा न करें। विशेष रूप से किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपनी मेहनत की कमाई या संपत्ति बेचकर निवेश करने से बचें। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।



