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राजस्थानी फिल्म ‘ओमलो’ वेव्स ओटीटी पर नंबर 1 ट्रेंडिंग, 120 से ज्यादा देशों के दर्शकों का मिला प्यार

मुंबई, 10 अगस्त 2026: राजस्थानी सिनेमा के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में फिल्म ‘ओमलो’ ने डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ओमलो’ वेव्स ओटीटी पर शानदार प्रदर्शन करते हुए नंबर 1 ट्रेंडिंग फिल्म का स्थान हासिल किया है। 3 जुलाई को Waves OTT पर रिलीज हुई इस फिल्म को दर्शकों का लगातार प्यार मिल रहा है और अब यह फिल्म दुनिया भर के 120 से अधिक देशों में दर्शकों तक पहुंच चुकी है।

‘ओमलो’ को IMDb पर भी 8.2 की शानदार रेटिंग मिली है, जो फिल्म को मिल रही दर्शकों की सराहना को दर्शाती है। पिछले दो सप्ताह से फिल्म वेव्स ओटीटी पर टॉप पोजिशन पर बनी हुई है। क्षेत्रीय भाषा की फिल्म के लिए यह उपलब्धि न सिर्फ फिल्म की टीम, बल्कि पूरे राजस्थानी सिनेमा के लिए भी उत्साहजनक मानी जा रही है।

‘ओमलो’ की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय यात्रा भी बेहद खास रही है। फ़िल्म को अभिनय, निर्देशन सहित कई वर्गों में 24 अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया है.

‘ओमलो’ एक संवेदनशील और भावनात्मक कहानी है, जो इंसानी रिश्तों, संघर्षों और जीवन की जटिल परिस्थितियों को राजस्थान की सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में प्रस्तुत करती है। फिल्म की कहानी आम लोगों की जिंदगी से जुड़े भावनात्मक पहलुओं को सामने लाती है और यही इसकी सबसे बड़ी खासियतों में से एक है। फिल्म ने यह साबित किया है कि अगर क्षेत्रीय कहानियों को ईमानदारी और प्रभावी सिनेमाई अलग-अलग क्षेत्रों और देशों के दर्शकों से जुड़ रही है।

फिल्म में शंभो महाजन, सोनू रणदीप चौधरी और सोनाली शर्मिष्ठा प्रमुख भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। ‘ओमलो’ का निर्माण रोहित माखीजा, मनीष गोपलानी, नेहा पांडे और सोनू रणदीप चौधरी ने किया है।

फिल्म के सिनेमैटोग्राफी की जिम्मेदारी विल्सन रैबिन्से ने संभाली है, जबकि एडिटिंग नवनीत कुमार सिन्हा ने की है। फिल्म का प्रभावशाली और भावपूर्ण बैकग्राउंड स्कोर देवेंद्र भोम ने तैयार किया है। फिल्म का संगीत गाजी खान बरना और भुवन आहूजा ने दिया है, जबकि गीतों के बोल फिल्म के निर्देशक सोनू रणदीप चौधरी ने लिखे हैं।

वेव्स ओटीटी पर लगातार दो सप्ताह तक नंबर 1 पोजिशन पर बने रहना, 120 से अधिक देशों में दर्शकों तक पहुंचना और IMDb पर 8.2 की मजबूत रेटिंग हासिल करना ‘ओमलो’ की सफलता को दर्शाता है। फिल्म ने यह साबित किया है कि अगर क्षेत्रीय कहानियों को ईमानदारी और प्रभावी सिनेमाई अंदाज में प्रस्तुत किया जाए, तो वे भाषा और भौगोलिक सीमाओं से आगे बढ़कर दुनिया भर के दर्शकों तक अपनी पहुंच बना सकती हैं

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