भोपाल में विद्युत यांत्रिकी विभाग का अधिकारी घूस लेते गिरफ्तार: जहां महिला ने 38 साल नौकरी की, मरने के बाद उसी के बेटे से GPF क्लीरेंस के लिए मांगी रिश्वत

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भोपाल29 मिनट पहले

लोकायुक्त ने विद्युत यांत्रिकी, जल संसाधन विभाग के स्थापना प्रभारी को 40 हजार रुपए की घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा है। उसने अपने ही विभाग की मृत महिला कर्मचारी के बेटे को जीपीएफ और अन्य लाभों के भुगतान के लिए घूस मांगी थी। घूस नहीं मिलने पर काम नहीं होने की धमकी दी थी। बेटे रिश्वत देने के लिए हामी भरी और लिए तैयार हो गया। हालांकि, उसने लोकायुक्त पुलिस को इसकी सूचना भी दे दी।

बेटे का दर्द… मां ने 38 साल सेवा दी, मौत के बाद घूस मांगा
मेरा नाम सिद्धार्थ सक्सेना है। जवाहर चौक का रहने वाला हूं। ऑटो पार्टस का बिजनेस है। मेरी मां नीना सक्सेना (59) कार्यपालन यंत्री विद्युत विभाग कोलार रोड में ट्रेसर के पद पर पदस्थ थीं। 18 जून 2022 को मां का निधन हो गया। उन्होंने करीब 38 साल तक विभाग में सेवाएं दीं। पूरे कॅरियर में कभी भी उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं हुई। मां ने सर्विस रिकॉर्ड में मुझे नॉमिनी बनाया था। मां के निधन के बाद जीपीएफ समेत अन्य लाभों के भुगतान के लिए मैंने कार्यालय कार्यपालन यंत्री विद्युत यांत्रिकी विभाग कोलार रोड में आवेदन किया। स्थापना प्रभारी जीके पिल्लई के पास आवेदन गया। जो मेरी मां के ऑफिस में ही साथ काम करते हैं। करीब 15 दिन तक वह मुझे आफिस बुलाते रहे। बाद में कहा कि सर्विस रिकाॅर्ड में तुम नीना सक्सेना के नामिनी नहीं हो। वह टरकाते रहे। सप्ताहभर बाद वह घूस के हिंट करने लगे। खुलकर घूस के लिए नहीं बोल रहे थे। तीन दिन पहले उन्होंने खुलकर बोला कि 40 हजार रुपए लगेंगे। तब भुगतान होगा। मैंने कहा कि बहुत अधिक पैसा है। इतना पैसा मैं कैसे दे सकता हूं। इस पर पिल्लई ने मुझे धमकी भरे लहजे में कहा कि आपका काम नहीं हो सकता। जब तक रुपए नहीं मिलते मैं काम नहीं कराऊंगा। इस पर मैंने पैसे देने के लिए हामी भर दी। 20 सितंबर को मैंने इसकी शिकायत लोकायुक्त एसपी मनु व्यास से की। एसपी ने जांच कराई। शिकायत सही पाई गई। गुरुवार सुबह पिल्लई ने मुझे मिलन रेस्टोरेंट एमपी नगर घूस लेकर आने को बुलाया। मैं पैसा लेकर पहुंचा। लोकायुक्त की 10 सदस्यीय टीम पहले से ही जाल बिछा रखी थी। मैंने पिल्लई को 40 हजार रुपए दिए। उसने अपनी पैंट की जेब में पैसा रख लिया। तभी लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया। वह अपने बचने के लिए तमाम दलीलें देते हुए गिड़गिड़ाता रहा।

जिस जेब में रिश्वत के रुपए रखे, टीम ने उसे उतरवा लिया।

जिस जेब में रिश्वत के रुपए रखे, टीम ने उसे उतरवा लिया।

कार्रवाई के दौरान सिद्धार्थ की तरफ देखकर घूरता रहा
लोकायुक्त पुलिस ने उसे मिलन होटल के नीचे दबोचा। इसके बाद आगे की कार्रवाई के लिए होटल के फर्स्ट फ्लोर में एक कमरे में लेकर पहुंची। पुलिस ने उसकी वह पैंट उतरवाई, जिसमें उसने घूस का पैसा रखा था। इसके बाद मोबाइल, बेल्ट, खुद के खर्च के लिए रखे पैसे बरामद किए। इस दौरान वह सिद्धार्थ को देखकर घूरता रहा। लोकायुक्त इंस्पेक्टर मनोज पटवा ने बताया कि फरियादी से आरोपी ने कई बार रिश्वत की मांग की थी। पैसा मिलने पर ही वह जीपीएफ क्लीयर करने की बात कहा रहा था।

लोकायुक्त की पूरी टीम होटल में पहुंची और मौके पर ही कार्रवाई शुरू की।

लोकायुक्त की पूरी टीम होटल में पहुंची और मौके पर ही कार्रवाई शुरू की।

दो बेटों में सिद्धार्थ नीना का छोटा बेटा
नीना के दो बेटे हैं। सिद्धार्थ उनका छोटा बेटा है। उनके नाम पर ही मां ने सर्विस बुक में नामिनी बनाया था, जिसे स्थापना प्रभारी मना कर रहा था। वह इसी के लिए पैसा मांग रहा था। सिद्दार्थ ने बताया कि पिल्लई उनकी मां को जानता था। मैंने कहा भी कि मां ने इतनी साल जिस विभाग में सेवा दीं। उनके काम के लिए घूस मांग रहे हैं। इस पर पिल्लई कहता था कि मेरे अलावा कोई काम नहीं करा सकता।

गिरफ्त में आने के बाद लोकायुक्त टीम के सामने गिड़गिड़ता रहा।

गिरफ्त में आने के बाद लोकायुक्त टीम के सामने गिड़गिड़ता रहा।

कोई घूस मांग रहा तो लोकायुक्त में ऐसे करें शिकायत

एसपी लोकायुक्त मनु व्यास ने बताया- कोई सरकारी कर्मचारी-अधिकारी रिश्वत की मांग करता है तो लोकायुक्त ऑफिस में आकर लिखित शिकायत करें।

फोन नंबर- 9827585513 पर भी सूचना दे सकते हैं। हम यह शिकायत को गुप्त रखते हैं।

फरियादी यह ध्यान रखें कि रिश्वत मांगने, देने के सात दिन के अंदर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत करनी है।

शिकायत को हम रजिस्ट्रेशन के लिए लोकायुक्त कार्यालय को भेजते हैं। रजिस्ट्रेशन होने के बाद ट्रैप की अनुमति मिलती है।

टीम कटेंट की जांच करती है। जैसे ही पता चलता है कि संबंधित अधिकारी रिश्वत मांग रहा है तो हम उसे ट्रैप करने के लिए योजना तैयार करते हैं।

शिकायतकर्ता को घूस के लिए वह नोट दिए जाते हैं, जिसमें रंग लगा होता है।

रिश्वत लेना, देना दोनों अपराध हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति रिश्वत देने की सूचना नहीं देता और लोकायुक्त संबंधित अधिकारी को ट्रैप करती है तो घूस देने वाले को भी आरोपी बनाया जाता है।

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